अपनी ढपली और अपना राग
कल कांग्रेस भवन में प्रदेशभर के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा था। मौका था नवनियुक्त शहर व जिला अध्यक्ष के शपथ ग्रहण का। शपथ ग्रहण के दौरान नेताओं का सुर भी अपने अंदाज में बदलते रहा। कार्यकर्ताओं को एकजुटता और अनुशासन का पाठ पढ़ाते रहे और एक दूसरे के लिए सुर बदला-बदला रहा। एक दूसरे पर निशाना भी साधते रहे। दिग्गज अपनी ढपली अपना राग में ही मस्त नजर आए। एक स्थानीय नेताजी ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस भवन में अब सब बदल रहा है, और भी चीजें बदलने की जरुरत है। मंच पर बैठे दिग्गजों से लेकर कार्यकर्ता भी उनकी जुबान से निकले एक-एक शब्दों का तौलते रहे और मतलब भी निकालते नजर आए। कार्यकर्ता तो यहां तक कहते सुने गए कि लगता है कि नेताजी चुनावी दौर की कड़वी यादों को अब तक भुला नहीं पाए हैं। कारण भी साफ है, समर्थकों के ऊपर अनुशंसा का डंडा तो जमकर चला था। कड़वी बातें इतनी जल्दी कहां भूल पाते हैं। सो नेताजी की जुबान पर भी बातें आ ही गई।
अपनी बातें इतनी जल्दी भूल गए
बात जब कांग्रेस भवन की निकल ही गई है तो इसे थोड़ा और आगे बढ़ा ही लेते हैं। जब दिग्गजों की बोल बेसुरे रहे तो फिर लोकल नेताजी कहां चुप रहने वाले हैं। इनका सुर तो और भी बेसुरा हो गया। कुछ घंटों पहले कुर्सी पर विराजमान हुए नेताजी की बात ही निराली रही। अनुशासन को लेकर इतनी बड़ी-बड़ी बातें कि सामने बैठे चीफ को पंसद नहीं आई। झिड़की लगा ही दी। कुर्सी वाले नेताजी की बोलती ही बंद हो गई। अनुशासन का डंडा लहराने और बड़ों को नापने की बात कहने वाले नेताजी की लंबी जुबान पर सामने बैठे कार्यकर्ताओं से रहा नहीं गया। नगर निगम चुनाव की याद करने लगे, जब नेताजी ने अपने ही पार्टी के एक दिग्गज नेता के खिलाफ भीतरघात किया था। एक ने दूसरे के कान में फुसफुसाया और बोला, अपना दिन भूल गया, जब भीतर ही भीतर चूहे की तरह अनुशासन को कुतर रहा था। जितनी मुंह उतनी बातें।
छत्तीसगढ़ के मोटे चूहे, पता नहीं क्या-क्या कूतर रहे
छत्तीसगढ़ में इन दिनों इतने मोटे-मोटे चूहे हो गए हैं, करोड़ों का धान चट कर जा रहे हैं। कवर्धा से लेकर बस्तर तक चूहों की मौजा ही मौजा। चूहों के बहाने अफसरों का मौजा अलग। घुसखोर और फर्जीवाड़ा करने वाले अफसरों ने बेजुबान चूहों को भी कहीं का नहीं छोड़ा। घुसखोर अफसरों के सामने बेजुबानों को तो छोड़िए जुबान वालों की हिम्मत नहीं होती कि कुछ बोल पाए। जांच एजेंसियों के सामने मुश्किल ये कि चूहों के खिलाफ कैसे कार्रवाइ करेंगे। बेजुबान नहीं तो जुबान वाले चूहे तो हैं। जांच एजेंसियों के सामने अच्छे अच्छो की जुबान खुल जाती है। इन चूहों की भला क्या….।
चूक गए जिले के दिग्गज नेता
गणतंत्र दिवस पर ध्वज फहराने वाले मंत्री,विधायक व सांसदों की सूची जीएडी ने जारी कर दी है। सूची में जिले के दिग्गज नेता चार बार के सांसद और वर्तमान में विधायक पुन्नूलाल मोहले को गृह जिला में चीफ गेस्ट बनने का सम्मान राज्य सरकार ने दिया है। अब मुंगेली से बाहर बिलासपुर की ओर नजर दौड़ाते हैं। यहां तो एक नहीं तीन-तीन दिग्गज हैं। पर यह क्या, दिग्गजों की तिकड़ी को मौका ही नहीं मिला। दिग्गजों के तिकड़ी के बीच सीएम आ रहे हैं। सीएम के प्रवास को लेकर तरह-तरह के कायस भी लगाए जा रहे हैं। कयास और अटकलबाजी को हम आपके लिए छोड़ते हैं, उम्मीद रखते हैं कि सीएम के प्रवास के मद्देनजर सब-कुछ अच्छा ही होगा।
अटकलबाजी
राष्ट्रीय पर्व पर जिले के दिग्गजों की याद जीएडी को क्यों नहीं आई। याद नहीं आई या फिर जानबुझकर भूला दिया। कारण आपको पता करना है।
कांग्रेस भवन में अनुशासन का ढिंगे हांकने वाले किस नेताजी को पीसीसी चीफ ने फटकार लगाई, डांट फटकार के साथ ही समझाइश भी दी। बोलती बंद कर पीसीसी चीफ चले गए। नजर रखिए, फ्यूचर प्रोग्राम में बड़बोले नेताजी की जुबान चलती है या फिर बोलती बंद रहेगी।
प्रधान संपादक

