बिलासपुर। भानुप्रतापपुर ईस्ट फारेस्ट डिवीजन के रिजर्व फॉरेस्ट में वन विभाग की जानकारी के बगैर 5 हजार पेड़ गायब हो गए। इस मामले में गोदावरी स्पात को दी गई माइनिंग लीज रद्द करने की मांग लेकर जनहित याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने वन विभाग से जांच रिपोर्ट पेश करने कहा है। दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई की तिथि तय की है।
भानुप्रतापपुर ईस्ट फारेस्ट डिवीजन के रिजर्व फारेस्ट क्रमांक 608 ग्राम कच्छे में गोदावरी स्पात को माइनिंग लीज दी गई थी। पहले 100 हेक्टेयर और बाद में 32 हेक्टेयर और दिया गया। इस दौरान वन विभाग ने जांच कर बताया कि, इस जगह पर कुल 11 हजार 600 पेड़ लगे हुए हैं, जिनका डायमीटर 20 सेमी से अधिक है, इन्हें काटना पड़ेगा। वन विभाग ने इन्हें काटना शुरू किया करीब 6 हजार पेड़ कटने के बाद बजट खत्म हो गया। इसे लेकर विभाग ने वर्ष 2015 में मार्गदर्शन मंगाया। इसके बाद पत्राचार होते होते वर्ष 2018 में बजट आया। जब वन विभाग की टीम बचे पेड़ों को काटने पहुंची तो वहां पेड़ ही नदारद थे। किसी को जन्त्री ही नहीं थी कि क्या हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश रंगारी ने पहले आरटीआई में जानकारी मांगी, इसके साथ शिकायत भी की गई। इस बारे में 2018 में स्वयं डीएफओ ने भी लिखा था कि पता कराएं पेड़ कहां गए।
2023 में रिपोर्ट पेश की गई कि, छोटे पेड़ भी बड़े हो गए हैं। इन सबके बीच याचिकाकर्ता राजेश रंगारी ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका पेश कर माइनिंग लीज निरस्त करने की मांग की। शासन ने कहा कि जांच टीम बनाई गई थी, उसकी रिपोर्ट आई है कि यहाँ कोई पेड़ नहीं हैं जो हैं वह कंपनी के ट्रकों के चले से धंसी रोड के नीचे आये हैं। डीएफओ ने इससे असंतुष्ट होते हुए फिर से रिपोर्ट पेश करने को कहा है। आज इसी मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में सुनवाई की गई। इसके बाद कोर्ट ने वन विभाग की रिपोर्ट के साथ आगामी दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई निर्धारित की है।
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