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January 12, 2026 1:34 am

हिंदी विश्वविद्यालय में त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

भाषाओं में भीतर का भाव और कथ्य एक ही है : प्रो. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

वर्धा, 11 जनवरी 2026।भारतीय साहित्य में एकात्मकता विषय पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शनिवार, 10 जनवरी को कस्तूरबा सभागार में हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की।

कार्यक्रम के प्रमुख सारस्वत अतिथि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के पूर्व कुलपति प्रो. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री ने कहा कि भाषाएँ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन उनके भीतर का भाव और कथ्य एक ही होता है। उन्होंने रामायण परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग–अलग भाषाओं में प्रस्तुत होने के बावजूद उसकी सांस्कृतिक चेतना एक समान बनी रहती है। भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक एकता स्वाभाविक और ऐतिहासिक है।

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए यह सौभाग्य का विषय है कि देश–विदेश से आए ऐसे विद्वानों और मित्रों को आमंत्रित करने का अवसर मिला, जो वास्तव में हिंदी और भारतीय भाषाओं के प्रेमी हैं। उन्होंने कहा कि भारत को प्रायः विदेशी दृष्टिकोण से पढ़ने की प्रवृत्ति रही है, जबकि आवश्यकता भारतीय भाषाओं और संस्कृति को केंद्र में रखकर संवाद स्थापित करने की है। उन्होंने संगोष्ठी में सहभागी सभी विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि ‘अनेकता में एकता’ भारत की मूल पहचान है। भारत का दर्शन एक है, जो विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त होता है। भाषा संबंधी विवाद प्रायः राजनीतिक कारणों से उत्पन्न होते हैं, जबकि आपसी सौहार्द से भाषाओं की एकात्मकता और सुदृढ़ होती है।

केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. हितेन्द्र मिश्र ने कहा कि भारत सदैव एक रहा है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक बिना किसी भाषा बाधा के यात्रा करते थे, जो भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रमाण है।

उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे ने कहा कि हिंदी और मातृ भाषाएँ हमारी ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार हैं। वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने कहा कि भारत विविधताओं का देश नहीं, बल्कि एक साझा सांस्कृतिक चेतना का राष्ट्र है।

उल्लेखनीय है कि संगोष्ठी के दौरान जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित वर्धा दर्शन एवं ‘मीडिया समय’ समाचार पत्रों का प्रस्तुतीकरण एवं प्रदर्शन किया गया। मंगलाचरण डॉ. जगदीश नारायण तिवारी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी साहित्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने किया।संगोष्ठी में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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