एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा महिला और बाल सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई और जागरूकता अभियानों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पुलिस पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है।
बिलासपुर जिले में महिला और बाल सुरक्षा को लेकर पुलिस की प्राथमिकता वर्ष 2025 में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। POCSO एक्ट सहित महिला-बाल अपराधों में सख्ती और जागरूकता अभियानों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील दृष्टिकोण से पीड़ितों का भरोसा मजबूत हुआ है।
पुलिस ने महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में त्वरित एफआईआर, शीघ्र गिरफ्तारी और प्रभावी जांच को प्राथमिकता दी। इसके साथ ही अदालतों में मजबूत पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाने की दिशा में ठोस प्रयास किए गए। अधिकारियों के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया में तेजी से अपराधियों में भय का माहौल बना।
‘चेतना’ जैसे अभियानों के तहत स्कूल-कॉलेजों, ग्रामीण और शहरी इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में महिलाओं और बच्चों को उनके अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि किसी भी समस्या की स्थिति में वे बिना भय के पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।
महिला हेल्पलाइन, बाल संरक्षण इकाइयों और विशेष पुलिस टीमों को सक्रिय किया गया। संवेदनशील मामलों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती से पीड़ितों को सहज माहौल मिला। पुलिस का मानना है कि विश्वास और संवेदनशीलता ही महिला-बाल अपराधों से निपटने की सबसे बड़ी ताकत है।
इन प्रयासों का असर यह रहा कि POCSO मामलों में कमी दर्ज की गई। एसएसपी सिंह का कहना है कि जागरूकता और सख्ती का यह संतुलन आगे भी बनाए रखा जाएगा, ताकि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
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