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January 26, 2026 2:51 am

जागरूकता से बदली तस्वीर, बिलासपुर में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी

एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा सड़क सुरक्षा केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नियमों के सख्त पालन के साथ लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। इसी संतुलन के कारण दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी आई है।

बिलासपुर जिले में बढ़ते वाहन दबाव और यातायात विस्तार के बावजूद वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। यह बदलाव बिलासपुर पुलिस द्वारा अपनाई गई सख्त प्रवर्तन नीति और व्यापक यातायात जागरूकता अभियानों का परिणाम माना जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा को केवल चालान तक सीमित न रखकर इसे जनसहभागिता से जोड़ने का प्रयास किया गया।

यातायात नियमों के उल्लंघन पर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। रेड सिग्नल जंपिंग, तेज गति से वाहन चलाना, नशे की हालत में ड्राइविंग, बिना हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे मामलों में व्यापक चालानी कार्रवाई की गई। इन कार्रवाइयों से न केवल नियमों के पालन में सुधार हुआ, बल्कि लोगों में यह संदेश भी गया कि सड़क पर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

इसके साथ ही पुलिस ने ब्लैक स्पॉट्स और एक्सीडेंट प्रोन क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी शुरू की। दुर्घटना स्थलों का अध्ययन कर यातायात संकेतक, स्पीड ब्रेकर और अन्य सुरक्षा उपायों के लिए संबंधित विभागों से समन्वय किया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दुर्घटनाओं में कमी के पीछे यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी अहम रहा।

एएसपी ट्रैफ़िक रामगोपाल करियारे के नेतृत्व में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियानों को भी समान महत्व दिया गया। स्कूलों, कॉलेजों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर यातायात नियमों की जानकारी दी गई। हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व को समझाने के लिए रैलियां, नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। युवाओं और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से जागरूक किया गया।

पुलिस ने व्यावसायिक वाहन चालकों और बस-ट्रक ड्राइवरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए, ताकि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण शिविरों के माध्यम से चालकों की फिटनेस पर भी ध्यान दिया गया।

एसएसपी रजनेश सिंह का कहना है कि सड़क दुर्घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय हैं। इसी सोच के साथ प्रवर्तन और जागरूकता के संतुलन से काम किया गया। वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि इन प्रयासों से दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी आई है, जो पुलिस की रणनीति की सफलता को दर्शाता है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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