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January 20, 2026 3:43 am

कारखाने में आग: मित्तल फर्नीचर प्रबंधन की लापरवाही से दो की मौत, जांच तेज

बिलासपुर। सिरगिट्टी स्थित मित्तल फर्नीचर के कारखाने में मंगलवार दोपहर लगी भीषण आग पर देर रात काबू पा लिया गया। बुधवार सुबह कारखाने के भीतर फंसे एक श्रमिक का कंकाल बरामद हुआ, जिसे कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिम्स भेजा गया है। इस हादसे में कारखाने के मैनेजर सहित दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गया है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की प्राथमिक जांच में कारखाना प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अब मामले की विस्तृत जांच औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से कर रहे हैं।


औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के निरीक्षक विजय सोनी ने बताया कि मंगलवार दोपहर सिरगिट्टी स्थित कारखाने में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और देर रात आग पर काबू पाया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मंगलवार सुबह एक टैंकर के जरिए करीब 10 हजार लीटर ज्वलनशील पदार्थ कारखाने में मंगाया गया था। टैंकर से इस पदार्थ को कारखाने में लगी बड़ी टंकियों में खाली किया जा रहा था। वहीं, बड़ी टंकी से मोटर की मदद से छोटे-छोटे कंटेनरों में भरने का काम चल रहा था। इसी दौरान मोटर के पास अचानक स्पार्किंग हुई, जिससे आग भड़क गई। आग इतनी तेजी से फैली कि वहां खड़ा एक एक्टिवा, तीन बाइक, एक मालवाहक वाहन और टैंकर पूरी तरह जल गए। इसके अलावा कारखाने में रखी लकड़ियां और फर्नीचर बोर्ड भी आग की चपेट में आ गए। छोटे कंटेनरों में विस्फोट शुरू होने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। श्रमिक अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे और वाहनों को हटाने तक का मौका नहीं मिल सका। इस हादसे में यदुनंदन नगर निवासी श्रमिक अभिजीत सूर्यवंशी की दर्दनाक मौत हो गई। बताया गया कि वह एक महीने से छुट्टी पर था और दो दिन पहले ही काम पर लौटा था। घटना के वक्त वह टैंकर के पास ही खड़ा था। आग भड़कने के बाद वह तारपीन के गोदाम में घुस गया, लेकिन दरवाजे के पास खड़े टैंकर में लगी आग तेजी से गोदाम तक फैल गई, जिससे उसे बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। दो लोगों की मौत के बाद भी कारखाना प्रबंधन शुरू में सामने आने से कतराता रहा। अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बातचीत के दौरान प्रबंधन की ओर से मृत श्रमिक के परिजन को अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये दिए गए। साथ ही छह लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही गई, जिसे परिजनों ने ठुकराते हुए 10 लाख रुपये की मांग की। प्रशासन की मध्यस्थता के बाद अंततः प्रबंधन 10 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमत हुआ। ंपुलिस की प्राथमिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कारखाने में भारी मात्रा में तारपीन तेल जैसे ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग होता था, इसके बावजूद यहां कोई फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद नहीं था। आग लगने की स्थिति में कर्मचारी पूरी तरह असुरक्षित थे। अब श्रमिकों के बयान दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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