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October 31, 2026 3:45 am

पत्रकारिता की आड़ में कथित वसूली पर लगाम लगाने आगे आया बिलासपुर प्रेस क्लब,अध्यक्ष अजीत मिश्रा ने साथियों समेत सौंपा ज्ञापन 

भ्रामक खबरों और विज्ञापन के नाम पर दबाव बनाने की शिकायतों पर शासन-प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, राज्य स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग

CBN36 बिलासपुर। पत्रकारिता की आड़ में कथित तौर पर भ्रामक खबरें चलाने और विज्ञापन के नाम पर अनुचित दबाव बनाकर वसूली करने की शिकायतों को बिलासपुर प्रेस क्लब ने गंभीरता से उठाया है। सोशल मीडिया पर पत्रकारिता के नाम पर संचालित हो रही गतिविधियों की निष्पक्ष जांच और ऐसी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रेस क्लब ने राज्य शासन एवं प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। प्रेस क्लब की इस पहल को जिम्मेदार पत्रकारिता की साख बचाने और डिजिटल मीडिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रेस क्लब ने राज्य शासन के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर बिलासपुर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मामले की गंभीरता से जांच कराने तथा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।

सोशल मीडिया पर पत्रकारिता के नाम पर गतिविधियों पर उठे सवाल

ज्ञापन में कहा गया है कि बिलासपुर जिले में इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वयं को पत्रकार के रूप में प्रस्तुत करने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर अपुष्ट एवं भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके साथ ही विज्ञापन और समाचार प्रकाशन के नाम पर अनुचित दबाव बनाने अथवा अवैध वसूली किए जाने के आरोपों की भी जांच आवश्यक बताई गई है।

प्रेस क्लब का कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध प्रशासनिक व्यवस्था, जनविश्वास, डिजिटल माध्यमों से प्रसारित होने वाली सूचनाओं की विश्वसनीयता और जिम्मेदार पत्रकारिता की प्रतिष्ठा से है।

यदि ऐसी शिकायतों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो इसका नुकसान उन पत्रकारों और समाचार संस्थानों को भी उठाना पड़ सकता है, जो पूरी जिम्मेदारी और निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।

सरकारी विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

बिलासपुर प्रेस क्लब ने सरकारी विज्ञापन जारी करने, उनकी स्वीकृति, भुगतान और शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की है। क्लब का कहना है कि विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतों की उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्षम एजेंसियों से जांच कराई जानी चाहिए।

इसके अलावा, भ्रामक अथवा अपुष्ट सामग्री प्रसारित किए जाने के मामलों में लागू कानूनों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई के दौरान वास्तविक डिजिटल पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों, समाचार संस्थानों और आम नागरिकों के वैध अभिव्यक्ति के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। किसी के पत्रकार होने या न होने का निर्णय मनमाने ढंग से करने के बजाय शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

पोर्टल संचालन के लिए अनुभव की अनिवार्यता का सुझाव

प्रेस क्लब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से समाचार प्रसारित करने और पोर्टल संचालन के नाम पर बढ़ती गतिविधियों के संदर्भ में केंद्र एवं राज्य सरकार से ठोस पहल करने की आवश्यकता भी जताई है।

ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष का कार्यानुभव अनिवार्य करने की व्यवस्था पर विचार किया जाए। यह अनुभव प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथवा किसी मान्यता प्राप्त संस्था में कार्य करने का हो सकता है।

साथ ही, यदि कोई संस्था निजी लाभ या परिचय के आधार पर किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र जारी करती है, तो ऐसे मामलों की गहन जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, पांच वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता फिलहाल प्रेस क्लब की ओर से दिया गया सुझाव है। इसे लागू करने के लिए संबंधित सरकारों को कानूनी, प्रशासनिक और संवैधानिक पहलुओं पर विचार करना होगा।

राज्य स्तर पर बने शिकायत निवारण की व्यवस्था

बिलासपुर प्रेस क्लब ने डिजिटल मीडिया से जुड़ी शिकायतों के निराकरण के लिए राज्य स्तर पर उपयुक्त व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। इसके तहत संबंधित विभागों के बीच समन्वय, शिकायतों की निष्पक्ष जांच, सरकारी विज्ञापन प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचाने के लिए जरूरी है कि कलम की ताकत का इस्तेमाल जनहित में हो, न कि कथित दबाव या अनुचित आर्थिक लाभ के लिए। शिकायतें सही पाई जाती हैं तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि किसी व्यक्ति या संस्था पर लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो उसके अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बिलासपुर प्रेस क्लब की इस पहल से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस सामने आई है। अब निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं कि वह ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर क्या कदम उठाता है और शिकायतों के निष्पक्ष निराकरण के लिए किस तरह की व्यवस्था विकसित करता है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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