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September 27, 2026 1:10 am

12 साल की उम्र में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ डटे रहे बाजी राउत, युवाओं को मिला साहस और बलिदान का संदेश

हिंदी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का आगाज, कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा बोलीं-सत्य और न्याय के लिए खड़े होना ही सच्ची कर्तव्यनिष्ठा

150 से अधिक विद्यार्थियों ने की भागीदारी, 2 अक्टूबर को होगा समापन और पुरस्कार वितरण

CBN36 वर्धा, 26 सितंबर। महज 12 साल की उम्र में अन्याय के सामने झुकने से इनकार कर अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद बाजी राउत की वीरगाथा शनिवार को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में गूंज उठी। उनकी विरासत और बलिदान से युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के कस्तूरबा सभागार में राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि बाजी राउत का अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के प्रति अटूट विश्वास हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत है। युवाओं को उनके जीवन से सीख लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

‘शहीद बाजी राउत की विरासत पर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन : राष्ट्र-निर्माण हेतु युवा अभिप्रेरण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में 150 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का आयोजन भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के तत्वावधान में ओडिशा अनुसंधान केंद्र (ORC) के सहयोग से किया गया।

नाव देने से किया इनकार, सीने पर खाई गोली

कुलपति प्रो. शर्मा ने बाजी राउत के बलिदान को याद करते हुए बताया कि अक्टूबर 1938 में ढेंकानाल रियासत के प्रजामंडल आंदोलन के दौरान 12 वर्षीय बाजी राउत ब्राह्मणी नदी के घाट पर नाव की रखवाली कर रहे थे। रियासत की पुलिस ने उनसे नदी पार कराने के लिए नाव मांगी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इस पर पुलिस की गोली से वे शहीद हो गए। उनके साथ छह अन्य ग्रामीणों ने भी अपने प्राणों की आहुति दी।

उन्होंने कहा कि बाजी राउत की शहादत महात्मा गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांतों का जीवंत उदाहरण है। बिना हथियार उठाए सत्य और न्याय के लिए अडिग रहना ही वास्तविक साहस है। आगामी 5 अक्टूबर को बाजी राउत के जन्म के 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं।

साहस की कोई उम्र नहीं, ईमानदारी से कर्तव्य निभाना ही सच्ची नागरिकता

कुलपति ने विद्यार्थियों को तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने कहा कि साहस किसी उम्र का मोहताज नहीं होता। सच्ची नागरिकता का अर्थ अपने दायित्वों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाना है। स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल बड़े शहरों और प्रसिद्ध सेनानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों गांवों, रियासतों और विभिन्न भाषाओं में भी इसकी गौरवशाली गाथाएं बिखरी हुई हैं।

उन्होंने शिक्षकों और शोधार्थियों से आह्वान किया कि बाजी राउत के जन्मशती वर्ष में ऐसी स्थानीय ऐतिहासिक स्मृतियों को खोजकर उनका अनुवाद करें और हिंदी के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाएं। विद्यार्थियों से उन्होंने हर परिस्थिति में सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े रहने तथा राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की।

निबंध और भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभा दिखाएंगे विद्यार्थी

सम्मेलन के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। निबंध लेखन प्रतियोगिता के लिए 27 सितंबर दोपहर 12 बजे तक ऑनलाइन प्रविष्टियां स्वीकार की जाएंगी। 28 सितंबर को महादेवी वर्मा सभागार में कार्यशाला आयोजित होगी। इसके दूसरे सत्र में चयनित पांच सर्वश्रेष्ठ निबंधों की प्रस्तुति दी जाएगी।

वहीं, 29 सितंबर को भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। सम्मेलन का समापन और पुरस्कार वितरण समारोह 2 अक्टूबर को होगा। प्रतियोगिताओं की श्रेष्ठ प्रविष्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय युवा सम्मेलन के लिए भेजा जाएगा।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई। नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर पाण्डेय ने स्वागत वक्तव्य देते हुए सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। विधि विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. जनार्दन तिवारी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।

समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. योगेन्द्र बाबू ने आभार व्यक्त किया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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