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July 7, 2026 5:44 pm

जब सूचना ही ताकत बने: ‘संग्रह’ के जरिए स्मार्ट पुलिसिंग की नई इबारत लिख रहा मुंगेली

“आईजी बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग की सोच को मिला आकार, एसएसपी भोजराम पटेल के निर्देश पर तैयार हुआ डिजिटल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम; मुंगेली बना पहला जिला, अब पूरे रेंज में लागू करने की तैयारी”

छत्तीसगढ़ ।आज की पुलिसिंग केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते समय में अपराध की प्रकृति, कानून-व्यवस्था की चुनौतियां, आपदा प्रबंधन, चुनाव, वीआईपी भ्रमण और सामाजिक-धार्मिक आयोजनों जैसे संवेदनशील अवसरों पर त्वरित निर्णय ही सफलता की सबसे बड़ी कसौटी बन चुके हैं। ऐसे समय में सही सूचना, सही स्थान पर और सही समय पर उपलब्ध होना पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है।

इसी सोच को व्यवहारिक रूप देते हुए मुंगेली जिले के एसएसपी आईपीएस भोजराम पटेल ने अपनी टीम के साथ संग्रह वेब एप्लीकेशन विकसित किया।यह केवल एक सॉफ्टवेयर या डाटा बैंक नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन के लिए एक डिसीजन सपोर्ट सिस्टम है, जो किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में अधिकारियों को त्वरित, सटीक और तथ्य आधारित निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है।

इस एप्लीकेशन के पीछे बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक आईपीएस रामगोपाल गर्ग की दूरदर्शी सोच और तकनीक आधारित पुलिसिंग का विजन है। वहीं पुलिस अधीक्षक आईपीएस भोजराम पटेल के निर्देशन में इसे विकसित कर मुंगेली जिले में पूरी तरह लागू किया गया है। मुंगेली प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां इस प्रकार की व्यापक डिजिटल सूचना प्रणाली को पूर्ण रूप से अमल में लाया गया है।

सूचना बिखरी नहीं, अब एक मंच पर

किसी बड़ी घटना के समय सबसे बड़ी चुनौती जानकारी जुटाने की होती है। कौन-सा गांव किस बीट में है, वहां की आबादी कितनी है, स्थानीय जनप्रतिनिधि कौन हैं, निकटतम अस्पताल कहां है, किस थाने का क्षेत्र है, किस मार्ग से जल्दी पहुंचा जा सकता है, वहां पहले कौन-सी बड़ी घटनाएं हुई हैं और कौन-कौन असामाजिक तत्व सक्रिय हैं ऐसी सूचनाएं पहले अलग-अलग अभिलेखों और कार्यालयों में उपलब्ध रहती थीं।

संग्रह ने इन सभी जानकारियों को एक ही डिजिटल मंच पर समेट दिया है। अब आवश्यकता पड़ते ही कुछ क्षणों में पूरी जानकारी अधिकारियों के सामने उपलब्ध हो जाती है।

गांव की पूरी प्रोफाइल, एक क्लिक पर

एप्लीकेशन का विलेज इंफॉर्मेशन मॉड्यूल इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। इसमें जिले के प्रत्येक गांव का डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया गया है।

किस गांव का थाना कौन-सा है, संबंधित बीट अधिकारी कौन है, गांव की जनसंख्या कितनी है, वहां स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थल और अन्य प्रमुख संस्थान कहां हैं, गांव का नक्शा क्या है, वहां तक पहुंचने में कितना समय लगेगा, पूर्व में कौन-कौन सी महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं तथा वहां सक्रिय निगरानीशुदा और असामाजिक तत्व कौन हैं-इन सभी जानकारियों का समेकित विवरण इसमें उपलब्ध है।कानून-व्यवस्था की स्थिति बनने पर यही जानकारी पुलिस की त्वरित कार्रवाई का आधार बन सकती है।

अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड, निगरानी होगी और प्रभावी

संग्रह में तैयार किया गया क्रिमिनल्स डाटाबेस पुलिस की निगरानी व्यवस्था को नई मजबूती देता है। इसमें गुंडा, निगरानी, माफी और अन्य असामाजिक तत्वों का विवरण, फोटो, पता तथा आपराधिक इतिहास सुरक्षित रखा गया है।

इससे अपराधियों की पहचान, निगरानी और आवश्यक कार्रवाई पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।

अनुभव से बनेगी भविष्य की रणनीति

पुलिसिंग केवल वर्तमान की चुनौती नहीं, बल्कि अतीत के अनुभवों से भविष्य की तैयारी भी है। इसी सोच के साथ एप्लीकेशन में इंसिडेंट डाटाबेस विकसित किया गया है, जिसमें जिले और राज्य में घटित प्रमुख सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं का संकलन किया गया है।इन घटनाओं का अध्ययन भविष्य में समान परिस्थितियों के दौरान रणनीति बनाने और बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा।

प्रशासन और समाज से तत्काल समन्वय

आपात स्थिति में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समाज का सहयोग भी महत्वपूर्ण होता है।

इसी उद्देश्य से डायरेक्टरी मॉड्यूल में प्रशासनिक अधिकारियों, बैंक, अस्पताल, विद्यालय, महाविद्यालय, औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं की संपर्क जानकारी उपलब्ध कराई गई है।वहीं जनप्रतिनिधि मॉड्यूल में सांसद, विधायक, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत, कोटवार तथा अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की जानकारी भी उपलब्ध है, जिससे किसी भी परिस्थिति में त्वरित समन्वय स्थापित किया जा सके।

डिजिटल मैपिंग से कम होगा रिस्पॉन्स टाइम

एप्लीकेशन का मैप मॉड्यूल जिले के सभी थाना और चौकी क्षेत्रों का डिजिटल मानचित्र उपलब्ध कराता है। गांवों की लोकेशन, दूरी, मार्ग और अनुमानित यात्रा समय तत्काल देखा जा सकता है।

आपदा, दुर्घटना या अपराध की सूचना मिलने पर यह सुविधा पुलिस की प्रतिक्रिया को पहले से अधिक तेज और प्रभावी बना सकती है।

वीआईपी सुरक्षा से साइबर अपराध तक

संग्रह में वीआईपी सिक्योरिटी मॉड्यूल, महत्वपूर्ण स्थान मॉड्यूल, इंटर स्टेट एवं इंटर डिस्ट्रिक्ट चेक पोस्ट मॉड्यूल और साइबर डाटा मॉड्यूल भी शामिल किए गए हैं।

वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था, सीमाई चेक पोस्ट, औद्योगिक क्षेत्र, गोदाम, पेट्रोल पंप, अस्पताल, धार्मिक स्थल, पर्यटन स्थल और साइबर अपराधों से जुड़े विश्लेषणात्मक आंकड़े भी इसमें उपलब्ध हैं।

अर्थात कानून-व्यवस्था से जुड़े लगभग प्रत्येक महत्वपूर्ण पक्ष को एक ही मंच पर समाहित करने का प्रयास किया गया है।

मुंगेली से पूरे रेंज तक

आईजी रामगोपाल गर्ग लंबे समय से तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देने पर बल देते रहे हैं। उनकी पहल पर विकसित यह मॉडल मुंगेली में पूरी तरह लागू किया गया है। उनका कहना है कि यहां के अनुभवों के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से बिलासपुर रेंज के सभी जिलों में लागू करने की योजना है।यदि यह मॉडल अपेक्षित परिणाम देता है तो भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी यह एक उपयोगी उदाहरण बन सकता है।

बदलती पुलिसिंग का नया अध्याय

डिजिटल युग में सूचना ही सबसे बड़ी शक्ति है। जिस पुलिस के पास सही समय पर सही जानकारी होगी, वही कम समय में बेहतर निर्णय ले सकेगी। ‘संग्रह’ इसी अवधारणा को व्यवहार में उतारने का प्रयास है।

यह एप्लीकेशन केवल डाटा संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि पुलिसिंग की उस नई सोच का प्रतीक है जिसमें तकनीक, अनुभव और त्वरित निर्णय क्षमता एक साथ काम करते हैं। मुंगेली में इसकी शुरुआत इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में पुलिस व्यवस्था और अधिक स्मार्ट, वैज्ञानिक तथा सूचना-आधारित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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