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July 6, 2026 4:36 pm

वनोपज बाजार में सुस्ती, चरोटा-नीम गुठली की खरीद घटी; डोरी सीड के भाव बरकरार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख लघु वनोपजों के बाजार में इन दिनों सुस्ती का माहौल है। चरोटा, बबूल बीज, नीम गुठली और डोरी सीड की खरीद अपेक्षा से काफी कम हो रही है। कारोबारियों के अनुसार कमजोर मांग के कारण लेनदेन सीमित है, हालांकि पर्याप्त भंडारण के चलते कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आई है। संग्राहक और व्यापारी दोनों बाजार में मांग बढ़ने और खरीदारों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

वनोपज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि खरीफ सीजन की सक्रियता और अच्छी बारिश की संभावना को देखते हुए कई संग्राहक फिलहाल अपनी उपज बेचने से बच रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में मांग बढ़ने पर बेहतर दाम मिल सकते हैं।

निर्यात ठप होने से चरोटा पर सबसे ज्यादा असर

चरोटा के प्रमुख खरीदार चीन, ताइवान, मलेशिया और जापान रहे हैं। इन देशों को निर्यात फिलहाल बंद होने से इसकी मांग पर सीधा असर पड़ा है। स्थानीय बाजार में भी खरीद सीमित है। इसके चलते चरोटा के भाव 2200 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हैं, जो पिछले दो वर्षों के सबसे निचले स्तरों में माने जा रहे हैं।

डोरी सीड के दाम बने हुए हैं मजबूत

महुआ की कमजोर फसल का असर डोरी सीड की उपलब्धता पर भी पड़ा है। इसके बावजूद इसके भाव 5000 से 5100 रुपये प्रति क्विंटल पर बने हुए हैं। खाद्य तेल उद्योग से फिलहाल सामान्य मांग है, लेकिन कारोबारियों का मानना है कि नए सीजन की शुरुआत के साथ खरीद में तेजी आ सकती है।

बबूल बीज और नीम गुठली की मांग भी कमजोर

बबूल बीज की मांग मुख्य रूप से पशु आहार उद्योग में होती है। विभिन्न राज्यों में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ने से इसकी खरीद धीमी हो गई है। वर्तमान में इसके भाव 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।

वहीं, नीम गुठली का उपयोग जैविक कीटनाशक और जैविक खाद बनाने वाली कंपनियां करती हैं। शुरुआती खरीद पूरी होने के बाद अधिकांश कंपनियां फिलहाल नया स्टॉक लेने के बजाय उपलब्ध भंडारण पर ध्यान दे रही हैं। इसके कारण इसके भाव 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल पर बने हुए हैं।

विशेषज्ञ बोले- औद्योगिक महत्व बना रहेगा

बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर के फॉरेस्ट्री वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने कहा कि वर्तमान कीमतें मांग और आपूर्ति की अस्थायी स्थिति को दर्शाती हैं। उनका कहना है कि चरोटा, डोरी सीड, बबूल बीज और नीम गुठली का औद्योगिक महत्व भविष्य में भी बना रहेगा। मांग बढ़ने के साथ इनके बाजार में फिर से तेजी आने की संभावना है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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