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July 6, 2026 5:51 pm

भगवान जगन्नाथ की जड़ी-बूटियों से हो रही सेवा, परंपरा का किया जा रहा निर्वहन

बिलासपुर। स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ के पारंपरिक ‘अनसर’ विश्राम काल के चलते इन दिनों रेलवे परिक्षेत्र स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस अवधि में भगवान के स्वास्थ्य लाभ की प्रतीकात्मक कामना करते हुए उनकी जड़ी-बूटियों एवं औषधीय सामग्री से विशेष सेवा-पूजा की जा रही है।

मंदिर में परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान को विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार लेप, काढ़ा एवं अन्य पारंपरिक औषधियों का अर्पण किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर महाअभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को ज्वर हो जाता है। इसके बाद वे लगभग 15 दिनों तक विश्राम करते हैं, जिसे ‘अनसर’ काल कहा जाता है। इस दौरान वे सार्वजनिक दर्शन नहीं देते।

मंदिर के पुजारियों ने बताया कि सेवा में तुलसी, चंदन, कपूर, इलायची, लौंग, जायफल सहित अन्य औषधीय तत्वों का उपयोग किया जा रहा है। यह सेवा भगवान के स्वास्थ्य लाभ का प्रतीक मानी जाती है और सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है।

अनसर काल के दौरान श्रद्धालु भगवान के शीघ्र स्वस्थ होने और पुनः दर्शन देने की कामना कर रहे हैं। विश्राम अवधि पूरी होने के बाद भगवान नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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