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July 3, 2026 1:33 pm

पेड़ के नीचे संचालित हो रहा प्राथमिक स्कूल, पहली-दूसरी में शून्य प्रवेश, सिर्फ 10 छात्र बचे

बिलासपुर,तखतपुर। जिले के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुटकू के स्टेशनपारा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला की बदहाल व्यवस्था ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण पिछले कई वर्षों से यह विद्यालय निजी मकान में संचालित हो रहा था, लेकिन अब मकान मालिक द्वारा ताला लगाए जाने के बाद बच्चों को सड़क किनारे पीपल के पेड़ के नीचे चटाई बिछाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

जानकारी के अनुसार, विद्यालय का मूल भवन अनुपयोगी होने के बाद पिछले करीब पांच वर्षों से स्कूल इंदिरा आवास के एक निजी मकान में संचालित किया जा रहा था। मकान मालिक मुकेश लोनिया ने बताया कि उन्होंने चार महीने के लिए भवन उपलब्ध कराया था, लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई और किराया भी नहीं मिला। इसके चलते उन्होंने मकान में ताला लगा दिया।

विद्यालय की वर्तमान स्थिति का असर प्रवेश पर भी पड़ा है। पालकों ने बच्चों का दाखिला कराना बंद कर दिया है। परिणामस्वरूप कक्षा पहली और दूसरी में एक भी छात्र का प्रवेश नहीं हुआ है, जबकि विद्यालय की पांच कक्षाओं में कुल केवल 10 छात्र अध्ययनरत हैं। विद्यालय में पदस्थ दो शिक्षकों में से एक 30 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

विद्यालय का नया भवन बनाने के लिए 23 अप्रैल 2026 को 11.48 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। ग्राम सरपंच का कहना है कि बारिश समाप्त होने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।

विद्यालय की शिक्षिका खगेश्वरी दुबे ने बताया कि 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद से ही पेड़ के नीचे पढ़ाई कराई जा रही है। तेज धूप, बारिश या पेड़ से कीड़े गिरने की स्थिति में पढ़ाई रोकनी पड़ती है और कई बार छुट्टी करनी पड़ती है। शोक कार्यक्रम होने पर भी विद्यालय बंद करना पड़ता है।

विद्यालय में शौचालय की सुविधा नहीं होने से छात्राओं और महिला शिक्षकों को खुले में तालाब की मेढ़ पर जाने की मजबूरी है। बच्चों को किताबों का वितरण भी पेड़ के नीचे ही किया गया, जबकि मध्याह्न भोजन रसोइया के घर पर तैयार किया जा रहा है।

जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए अप्रैल में लगभग साढ़े 11 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। फिलहाल विद्यालय को वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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