बिलासपुर, 19 जून। बिल्हा विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला हरदीकला की जर्जर स्थिति को लेकर स्वयं सिद्धा फाउंडेशन ने गहरी चिंता व्यक्त की है। फाउंडेशन की टीम द्वारा स्कूल का निरीक्षण करने पर सामने आया कि लगभग 286 छात्र-छात्राएं खपरैल युक्त पुराने और जर्जर भवन में अध्ययन करने को मजबूर हैं। कई कक्षाओं के छप्पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं तथा भवन की स्थिति विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।
फाउंडेशन के अनुसार विद्यालय परिसर में स्वच्छता एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को दैनिक आवश्यकताओं के लिए असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय की स्थिति के संबंध में समय-समय पर प्रशासन और शिक्षा विभाग को अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में कक्षा छठवीं, सातवीं और आठवीं के कुल 286 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। भवन की कमी के कारण कक्षा सातवीं की छात्राओं को दो पालियों में जर्जर कच्चे भवन में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। वहीं पक्के भवन में संचालित कक्षाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कई कमरों की खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं तथा फर्श भी खराब अवस्था में है।
विद्यालय भवन का निर्माण वर्ष 1966 में हुआ था। लगभग छह दशक पुराने इस भवन का लंबे समय से समुचित रखरखाव नहीं होने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई है। बरसात के मौसम में भवन की जर्जरता विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा देती है।
स्वयं सिद्धा फाउंडेशन की अध्यक्ष चंचल सलूजा ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए बच्चों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में शौचालय जैसी आवश्यक सुविधा का अभाव भी गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि विद्यार्थियों के हित में नए भवन के निर्माण तथा आवश्यक मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी जाए।
विद्यालय के प्रधान पाठक ज्ञानेंद्र राय ने बताया कि भवन की खराब स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भवन की कमी के कारण विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है तथा नए भवन निर्माण के लिए विभागीय स्वीकृति एवं फंड की प्रतीक्षा की जा रही है।
वहीं, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि विद्यालय की स्थिति की जानकारी प्राप्त हुई है। शीघ्र ही टीम भेजकर विद्यालय का निरीक्षण कराया जाएगा तथा आवश्यक प्रतिवेदन जिला कार्यालय को भेजा जाएगा। फंड उपलब्ध होते ही भवन निर्माण एवं मरम्मत की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
स्वयं सिद्धा फाउंडेशन ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय भवन के निर्माण, मरम्मत तथा मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए।
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