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August 3, 2026 8:15 pm

24 घंटे में सुलझे ब्लाइंड मर्डर केस में आरोपी को उम्रकैद, गवाह मुकरे फिर भी वैज्ञानिक विवेचना बनी दोषसिद्धि का आधार

“सभी गवाह होस्टाइल होने के बावजूद मेमोरेंडम, हथियार की बरामदगी और ई-साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा”

CBN36 बिलासपुर। चौकी बेलगहना पुलिस द्वारा महज 24 घंटे में सुलझाए गए ब्लाइंड मर्डर केस में माननीय न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में सुनवाई के दौरान सभी प्रमुख गवाह होस्टाइल हो गए, लेकिन तत्कालीन बेलगहना चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राज सिंह की वैज्ञानिक एवं सटीक विवेचना, आरोपी के मेमोरेंडम, हत्या में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी और ई-साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

पुलिस के अनुसार, मामला चौकी बेलगहना थाना कोटा के अपराध क्रमांक 769/2025, धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) का है। 4 अगस्त 2025 को पहाड़बछाली निवासी कोटवार गंगा बाई गंधर्व ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच छेदीलाल यादव की बृहस्पति बाई के घर में किसी अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी है। रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।

घटना की सूचना मिलते ही तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर में टीम गठित की गई। फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया और सभी भौतिक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का संकलन किया गया।

मामले की विवेचना तत्कालीन बेलगहना चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राज सिंह ने की। उन्होंने नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों का पालन करते हुए घटनास्थल की फोटो और वीडियोग्राफी कराई, ई-साक्ष्यों को सुरक्षित किया तथा वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र किए। विवेचना के दौरान संदेही यशराज भानु उर्फ छोटा (20 वर्ष), निवासी पहाड़बछाली को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार किया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त टांगिया बरामद किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को 5 अगस्त 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था।

सुनवाई के दौरान सभी प्रमुख गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, लेकिन आरोपी का मेमोरेंडम, उसकी निशानदेही पर हथियार की बरामदगी, वैज्ञानिक साक्ष्य तथा विवेचना के दौरान संकलित ई-साक्ष्यों को न्यायालय ने विश्वसनीय माना। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला वैज्ञानिक विवेचना, साक्ष्य संरक्षण और नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण उदाहरण है। तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राज सिंह की सटीक विवेचना और विधिसम्मत कार्रवाई ने ऐसे मामले में भी दोषसिद्धि सुनिश्चित की, जिसमें सभी प्रत्यक्ष गवाह होस्टाइल हो चुके थे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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