मंत्री को गुस्सा क्यों आया
पुरानी बजट का फंड, नया बजट का अलग से फंड, डिपार्टमेंट का खजाना भरा हुआ है, फंड की कमी नहीं है, इसके बाद भी तय समय पर काम पूरा नहीं हो पा रहा है। अब इसे क्या कहेंगे, लालफीताशाही कह लीजिए या फिर बाबूराज। जो आपको सहुलियत है। मतलब दोनों का एक ही है। तभी तो विभागीय मंत्री को गुस्सा आ गया और लोगों के सामने फूट भी पड़ा। निशाने पर आए इंजीनियर और बड़े साहब। गुस्साने का पूरा कारण है। बजट और फंडिंग के बाद भी काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। मंत्रीजी का गुस्सा हाेना लाजिमी है। अब इसके मायने निकालने वालों को क्या कहें, अलग-अलग लोग और मायने भी अलग-अलग। किसी की सोच पर ना हमारी और ना ही आपकी बस चलेगी। सोचने वाले तो अपने अंदाज में सोचेंगे ही।
रेत के खेल में गोलीबारी से लेकर और क्या-क्या होगा
छत्तीसगढ़ में रेत से तेल निकालने का खेल तो लंबे समय से चल ही रहा है, अब इस धंधे में गाेलीबारी से बात और भी आगे बढ़ गई है। कोरिया में जो कुछ हुआ वह बेहद खतरनाक और दिल को दहला देने वाली घटना है। दरिंदगी की हदें पार कर देने वाली घटना। कोरिया से लेकर सरगुजा और मैदानी इलाकों में भी कुछ इसी तरह का सीन समय-समय पर दिखाई दे ही जाता है। अपने बिलासपुर में भी कुछ इसी अंदाज में रंगदारी और माफियागीरी चल रही है। पता नहीं कब किस तरफ से सनसनी गोली चले और किसे छलनी कर चली जाए। रेत के खेल में सफेदपोश से लेकर ना जाने कितने लोग पर्दे के पीछे और पर्दे के आगे सक्रिय हैं। सफेदपोश के आगे तो सभी नतमस्तक हैं।
राहुल का दौरा और गरमाती सियासत
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के प्रवास पर आने वाले हैं। उनके प्रवास से ही प्रदेश की राजनीति गरमाने लगी है। पहले दो पूर्व सीएम के बीच शब्दों के बाण चले। सियासी तीर भी छूटे। अब बारी प्रदेश के मंत्री जी की है, मंत्री जी ने कांग्रेस के नेताओं को गजब की सलाह दे डाली है। मंत्री जी बोले, कांग्रेस शासनकाल में गजब का शराब घोटाला हुआ है, क्यों ना अपने नेता का पैर शराब से धोकर स्वागत सत्कार करे। दारू से पैर पखारने की सलाह मंत्री जी, कांग्रेस के नेताओं को दे रहे हैं। थोड़ा इंतजार करिए, कमेंट्स आ ही जाएंगे। यही तो सियासत है, शब्दों के तीर तो चलते ही रहेंगे, कभी इस ओर से तो कभी उस ओर से।
पुलिस कप्तान का नवाचार, युवा पीढ़ी की चिंता
बिलासपुर जिले के पुलिस कप्तान कानून व्यवस्था के साथ ही युवा पीढ़ी की चिंता भी लगातार कर रहे हैं। नवाचार को लेकर उनका कोई जवाब नहीं है। ड्रग पैडलर्स की संपत्ति को फ्रीज कराने से लेकर नेटवर्क को ध्वस्त करने में लगातार काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर से ही सफेमा कोर्ट जाने का सिलसिला प्रारंभ हुआ है। सफेमा कोर्ट से ही नशे की काली कमाई से बनाई संपत्ति को फ्रीज करने का आदेश जारी होता है। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर पुलिस ने ही सफेमा जाने का निर्णय लिया, अब तो पूरे प्रदेश में यह सिलसिला चल पडा है। पुलिस कप्तान को युवा पीढ़ी की चिंता है, युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए नित नए प्रयोग और अभियान भी चला रहे हैं। उम्मीद करते हैं उनका यह अभियान सफल रहे और सफलता के कदम चूमे।
अटकलबाजी
मंत्रीजी को गुस्सा क्यों आया, इंजीनियरों को जमकर फटकार पड़ी, तब जनप्रतिनिधि और मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। आप भी सोचिए, आखिर ऐसा क्यों हुआ, कुछ तो बात है।
कोरिया की घटना के बाद पुलिस की टेढ़ी नजर किस-किस पर है, रेत के सौदागरों को किस विभाग के उनके अपने शुभचिंतक सचेत कर रहे हैं। एआई का जमाना है, कॉलडिटेल भी निकलकर सामने आ जाएगा।
प्रधान संपादक


