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June 12, 2026 1:32 pm

कानाफूसी

आंदोलन बनाम शक्ति प्रदर्शन, ये सीन अच्छा नहीं है

कांग्रेस में इन दिनों जो कुछ चल रहा है और जो कुछ दिखाई दे रहा है, यह सीन अच्छा नहीं है। सरकार को घेरने के बाद कांग्रेसी दिग्गज और पदाधिकारी अपनो को ही घेरने में पसीना बहा रहे हैं। कहावत है, तू डाल-डाल तो मैं पांत-पांत। कुछ इसी अंदाज में कांग्रेसी दिग्गज सड़कों पर पसीना बहाते दिखाई दे रहे हैं। सवाल भी उठ रहा है, आखिर यह सब किसलिए और किसके लिए। विधानसभा चुनाव में अभी ढाई साल का वक्त है। टिकट का फंडा तो फिलहाल बिलकुल भी नहीं है। फिर यह सब क्यों और कैसा। तब एक ही सवाल जेहन में उठता है और कार्यकर्ताओं के बीच गूंजता है। बस और कुछ नहीं एक दूसरे को नीचे दिखाना और अपनी रोटी सेंकने की कवायद है। अगर ऐसा ही चलना है तो सत्ताधारी दल के सेहत में कुछ खास फर्क पड़ने वाला नहीं है। 

सुशासन तिहार और कांग्रेस का अलग ट्रेंड

सुशासन तिहार अब अपने अंतिम पड़ाव में पहुंच गया है, बिलासपुर जिले में तिहार के दौरान कुछ अलग तरह का सीन दिखाई दिया। अच्छा रहे तिहार के मौजूदा दौर में कांग्रेस ने अलग तरह की राजनीति खेली। लोगों की भीड़ अपने साथ ले जाना और व्यवधान खड़ी करना। ये राजनीति ना तो तिहार में मौजूद लोगों को पसंद आई और ना ही अफसरशाही को। कांग्रेस ने अफसरशाही और जनता दोनों को नाराज कर दिया। आपको याद होगा तो बिल्हा से लेकर बेलतरा और सिरगिट्टी से लेकर जिले की और भी शिविर, जहां कांग्रेस के नेताओं ने सुर्खियां बटोरने के लिए अलग राजनीतिक चाल चली, मीडिया में तो बने रहे पर जनता की दिलों में जगह नहीं बना पाए। पब्लिक के रिएक्शन का असर आने वाले दिनों में पता चलेगा। अभी मीडिया मैनेजमेंट के सहारे अपोजिशन के भैया और भैया समर्थक खुश नजर आ रहे हैं। खुशी कितने दिन टिकी रहेगी ये तो वे ही जाने, ज्यादा जाने वाली पब्लिक अभी साइलेंट है। उनका पत्ता को सीधे ईवीएम में ही खुलता है। जब जनता जर्नादन का पत्ता खुलता है तब क्या होता है, यह सबको अच्छी तरह पता है।

नेताजी को गुस्सा क्यों आया, जुबान क्यों फिसल गई

बात जब सरकार के महत्वाकांक्षी योजना की चल पड़ी है तब एशिया के सबसे बड़े ब्लॉक बिल्हा की चर्चा जरुरी होती है, बिल्हा के मतदाताओं ने छत्तीसगढ़ को स्पीकर दिया, प्रदेश भाजपा संगठन को अध्यक्ष दिया, ये क्या कम बड़ी बात है। यहां की पब्लिक ने तो बरसों बरस से चली आ रही  उस परंपरा को भी तोड़ा है जहां चुनाव में कभी कोई रिपीट नहीं कर पाए। मतदाताओं ने जिन्हें स्पीकर बनाया उनको अपने सिर आंखों पर भी बैठाया, बरसों की परंपरा को एक झटके में तोड़ दिया। बात को पीछे लेकर चलते हैं, सुशासन तिहार और नेताजी का गुस्सा। आमतौर पर सहज शांत और खुशमिजाज रहने वाले नेताजी को आखिर गुस्सा किस बात पर आया और क्यों आया। हम तो समझ नहीं पाए, अगर आप समझ गए होंगे तो हमें भी बताइएगा। बहरहाल अफसर भी इसे लेकर अनजान है और भीतर ही भीतर असहज भी हो रहे हैं। मन ही मन सोच रहे हैं, नेताजी को ऐसा ही गुस्सा उन पर आ गया तब क्या होगा। सोचकर ही अफसरशाही पसीा-पसीना हुए जा रहे हैं।

मदिरा प्रेमियों के लिए रोज आ रही बुरी खबर

मदिरा प्रेमियों के लिए रोज़ ही बुरी खबर आ रही है। एक दिन पहले सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा था, बलौदाबाजार जिले के एक शराब दुकान के सेल्समैन के घर में देशी शराब बनाने की फैक्ट्री मिली,मतलब समझ रहे हैं, सेल्समैन अपने घर में देशी शराब बनाता था और उसे सरकारी शराब दुकान में खपाने का गोरखधंधा कर रहा था, क्वालिटी तो फिर पूछिए ही मत। बात यहीं तक होती तो भी मदिरा प्रेमी समझौता कर लेते, अंग्रेजी शराब की बोतल भी मिली। एक दिन आगे चलते हैं, गुरुवार को देशी शराब की सील पैक बोतल के भीतर कीड़ा मिला। अब इसे क्या कहेंगे। ये तो हद ही हो गई। मदिरा प्रेमियों के लिए यह सबसे बुरी खबर हो सकती है।

अटकलबाजी

अलग-अलग लीडरशीप और अलग-अलग आंदोलन, कांग्रेस के नेताओं के इस नए ट्रेंड से किनको सबसे ज्यादा चुनौती मिल रही है। इसके पीछे का कारण क्या हो सकता है। 

सुशासन तिहार के मौके पर नेताजी को जमकर गुस्सा आया, जुबान फिसल गई। वीडियो भी वायरल हो गया। नेताजी को गुस्सा क्यों आया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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