
“स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान से जहां सुकमा के अंदरूनी इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं, वहीं जिससे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है”
रायपुर, 28 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्र सुकमा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के माध्यम से अब उन दुर्गम गांवों तक भी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जहां पहले पहुंचना कठिन माना जाता था। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर मरीजों की जांच और उपचार कर रही है।
अभियान की खास बात यह है कि स्वास्थ्य कर्मी अब अस्पतालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैदल और कठिन रास्तों से होकर दूरस्थ बस्तियों तक पहुंच रहे हैं। यहां मलेरिया, टीबी, कुष्ठ रोग के साथ ही बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसी बीमारियों की जांच कर मरीजों को उपचार के लिए चिन्हित किया जा रहा है।
हाल ही में पुटेपढ़ गांव के एक मरीज को 310 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला अस्पताल तक पहुंचाया गया। यह पहल स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और समन्वय का उदाहरण मानी जा रही है, जिसमें समय पर काउंसलिंग और फॉलो-अप के जरिए मरीज का जीवन बचाया गया।
राज्य सरकार की आयुष्मान भारत योजना भी ग्रामीणों के लिए राहतकारी साबित हो रही है। योजना के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। किस्टाराम और मरईगुड़ा क्षेत्रों में 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर बनाकर उन्हें तत्काल उपचार की सुविधा दी गई।
इसके साथ ही राज्य में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से उपचार की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
अभियान के अंतर्गत कोंटा क्षेत्र में जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण, मोतियाबिंद परामर्श तथा अस्थमा और सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष शिविर आयोजित किए गए।
स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान से सुकमा के अंदरूनी इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं, जिससे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधान संपादक


