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April 26, 2026 4:08 pm

ऐतिहासिक नगरी मल्हार में 2000 वर्ष पुराना ताम्रपत्र मिला, अनमोल विरासत उजागर

ज्ञान भारतम अभियान के तहत जिले में मिल रहीं ऐतिहासिक पांडुलिपियां और धरोहरें

बिलासपुर, 26 अप्रैल 2026। ज्ञान भारतम अभियान के अंतर्गत जिले की ऐतिहासिक नगरी मल्हार में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है। यहां निवासी संजीव पाण्डेय के घर से लगभग 3 किलोग्राम से अधिक वजन का एक दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है। ताम्रपत्र पर प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लेख उत्कीर्ण पाए गए हैं, जिसे विशेषज्ञ लगभग 2000 वर्ष पुराना मान रहे हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, ब्राह्मी लिपि भारत की प्राचीनतम लिपियों में से एक रही है, जिसका उपयोग मौर्य काल से लेकर कई शताब्दियों तक किया जाता रहा। वहीं पाली भाषा मुख्यतः बौद्ध धर्म के ग्रंथों और शिक्षाओं से जुड़ी रही है, जिससे इस खोज का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन काल में ताम्रपत्रों का उपयोग भूमि दान, राजकीय आदेश तथा धार्मिक घोषणाओं के दस्तावेज के रूप में किया जाता था। ऐसे में इस ताम्रपत्र का वैज्ञानिक परीक्षण और गहन अध्ययन उस समय की सामाजिक संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाल सकता है।

ज्ञान भारतम अभियान के तहत सामने आई यह खोज न केवल मल्हार क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को उजागर करती है, बल्कि शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए भी नई संभावनाएं खोलती है।

उल्लेखनीय है कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम अभियान’ के माध्यम से देशभर में प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल के तहत ग्राम सभाओं के माध्यम से लोगों को अपनी पुरानी पांडुलिपियों और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने तथा उन्हें सामने लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

अभियान का उद्देश्य भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा और दर्शन से जुड़े अमूल्य दस्तावेजों का संरक्षण और दस्तावेजीकरण करना है। विशेषज्ञों द्वारा इन पांडुलिपियों की पहचान कर उनका डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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