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April 23, 2026 1:58 am

जनसंपर्क को मिले पाँचवें स्तंभ का दर्जा: विश्वास निर्माण में अहम भूमिका

डॉ. अजीत पाठक(राष्ट्रीय अध्यक्ष, पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया ने रखा दृष्टिकोण)

वर्धा महाराष्ट्र ।लोकतंत्र में जनसंपर्क को पाँचवें स्तंभ के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक ने कहा कि आज के दौर में सरकार, संगठन और व्यक्ति सभी अपनी सकारात्मक छवि और विश्वास अर्जित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसकी स्वयं की धारणा से नहीं, बल्कि समाज में उसके प्रति लोगों की सोच से बनती है। ऐसे में सकारात्मक छवि का प्रबंधन ही जनसंपर्क का मूल उद्देश्य है, जो विभिन्न हितधारकों के बीच विश्वास का सेतु बनाता है।

डॉ. पाठक ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में विश्वास का संकट गहराता जा रहा है, जिसे जनसंपर्क के माध्यम से दूर करने की आवश्यकता है। जनसंपर्क न केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है, बल्कि यह समाज में सकारात्मकता और पारदर्शिता को भी बढ़ावा देता है।

लोकतंत्र के चार स्तंभ और जनसंपर्क की भूमिका

उन्होंने बताया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया को क्रमशः चार स्तंभों के रूप में मान्यता प्राप्त है।

  • विधायिका कानून निर्माण करती है
  • कार्यपालिका उन्हें लागू करती है
  • न्यायपालिका न्याय सुनिश्चित करती है
  • मीडिया पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखता है

इन चारों स्तंभों के बीच संतुलन और समन्वय स्थापित करने में जनसंपर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क लोकतंत्र के विभिन्न घटकों के बीच संवाद स्थापित कर मजबूत राष्ट्र निर्माण में सहयोग करता है।

पीआरएसआई की सक्रिय भूमिका

डॉ. पाठक ने बताया कि 1958 में स्थापित पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया देश में जनसंपर्क को एक पेशे के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था के 25 से अधिक चैप्टर और 5000 से अधिक सदस्य हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं।

पीआरएसआई ने समय-समय पर मीडिया पारदर्शिता, मतदाता जागरूकता, एकता भारत अभियान, आतंकवाद विरोधी आंदोलन और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे विषयों पर अभियान चलाए हैं। संस्था का अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी जुड़ाव है, जिससे वैश्विक स्तर पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिला है।

कोविड काल में उल्लेखनीय कार्य

कोविड-19 महामारी के दौरान पीआरएसआई ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाए। संस्था ने चिकित्सा कर्मियों और पुलिस को सहयोग प्रदान किया तथा वेबिनार और अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक किया।

युवाओं और शोध को प्रोत्साहन

जनसंपर्क क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए पीआरएसआई द्वारा पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाता है। साथ ही छात्रों के लिए प्रशिक्षण, प्रतियोगिताएं और ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

भारत के विकास में जनसंपर्क की भूमिका

डॉ. पाठक ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। आईटी, रक्षा, और आर्थिक क्षेत्र में विकास के साथ जनसंपर्क उद्योग की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ‘भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनसंपर्क विश्वास निर्माण और संवाद के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान देगा।

तकनीक और नैतिकता पर जोर

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच जनसंपर्क पेशेवरों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। तकनीक के नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था सुरक्षित रह सके।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क को पेशेवर मान्यता देने और इसे लोकतंत्र के पाँचवें स्तंभ के रूप में स्थापित करने की दिशा में सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत और सकारात्मक छवि प्रस्तुत कर सके।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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