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March 13, 2026 8:17 pm

संस्कृति के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम है अनुवाद : प्रो. जी. गोपीनाथन

हिंदी विश्वविद्यालय में ‘भारतीय भाषा, साहित्य एवं संस्कृति की महत्ता तथा अनुवाद की भूमिका’ विषय पर पुनश्चर्या कार्यक्रम का उद्घाटन

वर्धा।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं सुविख्यात अनुवादविद् जी. गोपीनाथन ने कहा कि अनुवाद केवल भाषा और साहित्य का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों के आदान-प्रदान का प्रभावी साधन भी है। संवाद के माध्यम से वैश्विक स्तर पर उत्पन्न संकटों के समाधान में भी अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वे विश्वविद्यालय में यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के अंतर्गत ‘भारतीय भाषा, साहित्य एवं संस्कृति की महत्ता तथा अनुवाद की भूमिका’ विषय पर आयोजित बारह दिवसीय पुनश्चर्या कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को ग़ालिब सभागार में किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए अध्यापकों ने सहभागिता की।

प्रो. गोपीनाथन ने कहा कि भाषाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में अनुवाद की अहम भूमिका है। हमारे सांस्कृतिक स्रोत ग्रंथ जैसे रामायण, महाभारत, भगवद्गीता और पंचतंत्र के अनेक भाषाओं में अनुवाद होने से भारतीय संस्कृति का संदेश विश्वभर में प्रसारित हुआ। उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, भास तथा विलियम शेक्सपीयर की रचनाओं के अनुवाद ने भी विचारों और संस्कृतियों के व्यापक आदान-प्रदान को संभव बनाया।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक और बौद्धिक परिवर्तन लाने में भी अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ज्ञान-विज्ञान के प्रसार, नवसृजन और प्रेरणा के लिए अनुवाद एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है। पत्रकारिता और फिल्म जैसे माध्यमों में भी अनुवाद के कारण भारतीय साहित्य और संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान मिली है।

प्रो. गोपीनाथन ने कहा कि हिंदी विश्वविद्यालय में अनुवाद अध्ययन को विशेष महत्व दिया गया है और भारत में पहली बार यहां अनुवाद प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य देश-विदेश के साहित्य को व्यापक स्तर पर प्रसारित करना है। उन्होंने कहा कि आज विश्वभर में द्विभाषी विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। पर्यटन सहित अनेक क्षेत्रों में अनुवादकों के लिए रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। साथ ही वर्तमान समय में मशीन अनुवाद पर भी तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चिंतन को दिशा देने और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने में भी अनुवाद एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभरा है।

कार्यक्रम का प्रस्ताविक संबोधन प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक अवधेश कुमार ने दिया। उन्होंने बारह दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों से विषय-विशेषज्ञों के व्याख्यानों का लाभ उठाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की शुरुआत कुलगीत से तथा समापन राष्ट्रगान से हुआ।

कार्यक्रम का संचालन अनुवाद अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं कार्यक्रम समन्वयक राम प्रकाश यादव ने किया, जबकि भाषाविज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक एच. ए. हुनगुंद ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैलेश कदम, डॉ. राकेश सिंह फकलियाल, डॉ. वरुण कुमार उपाध्याय, डॉ. राम कृपाल, डॉ. आम्रपाल शेंदरे, डॉ. प्रदीप तथा डॉ. जगदीश नारायण तिवारी सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में जनसंपर्क अधिकारी बी.एस. मिरगे, संगीता मालवीय, राजेश आगरकर, हेमंत दुबे, मिथिलेश राय, विक्रांत, राम प्रवेश, जयश्री डफरे और रोहिणी गायकवाड सहित अन्य सहयोगियों ने सहयोग प्रदान किया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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