सिर मुड़ाते ही ओले पड़े, ये क्या हो गया
सदाबहार कहावत है, सिर मुड़ाते ही ओले पड़े। किसके सिर में ओले पड़े और उस दौर में उसने क्या और कैसे महसूस किया होगा,ये तो वही जाने, किसने इस कहावत को पब्लिक में लाया, यह भी लाने वाले ही जान और समझ सकते हैं। पर इस कहावत के जरिए जो बात आपसे करने वाले हैं वह है कांग्रेस का संगठन सृजन। राहुल गांधी का संगठन के लिहाज से ड्रीम प्रोजेक्ट। माना जा रहा है, जिनकी भी इस दौर में नियुक्ति हुई है, जिम्मेदारी सौंपी गई है, सभी को साथ लेकर चलेंगे। पर यह क्या, बिलासपुर में तो उलटी गंगा बह गई। गुटबाजी ऐसी कि बिलासपुर से लेकर कोटा तक नजर आई। पदयात्रा के दौर फोटो विवाद गहरा गया। एआईसीसी महासचिव व प्रदेश प्रभारी के साथ-साथ पीसीसी चीफ की फोटो भी बैनर पोस्टर से गायब। बस फिर क्या था, पीसीसी महामंत्री ने कारण बताओ नोटिस थमा दी। संगठन सृजन के इस दौर की पहली नोटिस। नोटिस पर क्या होगा यह तो आगे की बात है, सीआर खराब हो जाएगा ये सौ फीसदी सच है।
एसआईआर या मिशन नाम उड़ाओ
एसआईआर को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है। पश्चिम बंगाल से लेकर छत्तीसगढ़ तक। उसमें भी सरगुजा और बेलतरा में कुछ ज्यादा ही हंगामा। बेलतरा विधानसभा के 125 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से उड़ाने के लिए फार्म सात भर दिया। जिसने फार्म भरा उसके सही नाम का पता नहीं चल पाया है। फर्जी नाम से असली मतदाताओं के नाम को वोटर लिस्ट से उड़ाने की कोशिशें हो रही है। पहले कोरबा और अब बेलतरा और अंबिकापुर। ये सब क्या हो रहा है। तीन जगहों से तो हल्ला खूब हो रहा है। कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं, यह तो ट्रेलर है। असली पिक्चर तो फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद शुरू होगा। बहरहाल एसआईआर और वोटर लिस्ट से नाम गायब कराने की कोशिशों के बीच कांग्रेस का हंगामा जारी है। मुद्दा मिल गया कहें या फिर नाम उड़ाओ मिशन को लेकर सियासत गरमा रहा है। जो भी कह लें, है तो हॉट टापिक।
मंत्रियों की परेड लेंगे दिग्गज विधायक
छत्तीसगढ़ का बजट सत्र प्रारंभ होने वाला है। ऐसा भी कह सकते हैं कि बजट सत्र को लेकर उलटी गिनती शुरू हो गई है। सत्ताधारी दल के सीनियर एमएलए जो मंत्री की कुर्सी से दूर हैं या दिल्ली ने जिनसे दूरी बना ली है,एक बार फिर तगड़ा होमवर्क कर रहे हैं। सीनियर एमएलए सत्र के दौरान मंत्रियों की जमकर क्लास लेंगे। अब तक तो यही देखने में आया है, सीनियर एमएलए के साथ मंत्री चुप्पी साध लेते हैं या यूं कहें कि सवालों का जवाब ही नहीं रहता। वो तो भला हो स्पीकर का जो बीच-बीच में हस्तक्षेप कर मंत्रियों को बचा ले जाते हैं। इसके बाद भी दिग्गज विधायकों के सवालों से मंत्री बच नहीं पाते। सदन में निरुत्तर होते तो देखा है और भी बहुत होते अफसर और दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने देखा है। बहरहाल बात बजट सत्र की हो रही है, सरकार के साथ ही साथ दिग्गज विधायक भी अपनी तैयारी कर रहे हैं। देखते हैं इस बार मंत्रियों का होमवर्क कैसे रहता है और परफार्म कैसे करते हैं।
ड्रोन,बीट सिस्टम और एसएसपी की तगड़ी चौकसी
बिलासपुर जिला एक बार फिर छत्तीसगढ़ में रोल मॉडल बनने की दिशा में कई कदम आगे बढ़ा चुका है। पुलिस कप्तान ने सिस्टम ही ऐसा बनाया है जिसकी चर्चा अब छत्तीसगढ़ के बड़े से लेकर छोटे शहरों में जमकर होने लगी है। पुलिस बीट सिस्टम,ड्रोन के जरिए निगरानी और दोपहिया से लेकर चार पहिया वाहनों में जीपीएस सिस्टम। क्रिमिनल बैक ग्राउंड वाले लोगों के घर रात में छापामारी और सीधे जेल की हवा। ड्रोन के जरिए उन अड्डों पर पैनी निगाह जहां अपराधी क्राइम करने अड्डा बनाकर रखे हैं। जाहिर सी बात है यह सब एसएसपी की अगुवाई में ही संभव है। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिला एक बार फिर रोल मॉडल का जिक्र हमने किया है। इसके पहले नशे के सौदागरों की संपत्ति को फ्रीज कराने का काम बिलासपुर जिले में ही शुरू हुआ था। तब जिले के लोगों ने सफेमा कोर्ट मुंबई का नाम शायद पहली बार ही सुना था। नशे के सौदागरों द्वारा नशा बेचकर अर्जित संपत्ति को फ्रीज कराने का काम बिलासपुर जिले की पुलिस ने ही पहले शुरू किया था। नए सिस्टम की शुरुआत से एक बार फिर जिला, पुलिस और पुलिस कप्तान चर्चा में हैं।
अटकलबाजी
संगठन सृजन से अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने वाले एक अध्यक्ष को पीसीसी ने शोकॉज नोटिस थमा दिया है। शोकॉज नोटिस का जवाब देने के बाद आका मैनेज कर लेंगे, या आका ने मैनेज कर लिया भी होगा, सीआर जो खराब हुआ है उसका क्या,उसकी भरपाई कैसे और कहां से होगी।
एसआईआर में मतदाता सूची से नाम उड़ाने की शिकायत कांग्रेसी जोर-शोर कर रहे हैं। बात-बात पर कांग्रेसियों के आरोपों का काउंटर करने वाले भाजपाई, इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। चुप्पी साधने का राज क्या है।
प्रधान संपादक


