बिलासपुर। सरकारी पट्टे की अहस्तांतरणीय जमीन को निजी बताकर बेचने और पूरी रकम लेने के बाद रजिस्ट्री पश्चात नामांतरण पर रोक लगवाने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने पूर्व सैनिक के खिलाफ धोखाधड़ी का जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में लिया है।

सिविल लाइन क्षेत्र के सुभाष काम्प्लेक्स जरहाभाठा निवासी नीता ठाकुर (58) ने थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि उनके पति मेघराज ठाकुर का परिचय सीपत क्षेत्र के ग्राम पंधी निवासी पूर्व सैनिक कमलकांत श्रीवास से था। इसी पहचान का फायदा उठाते हुए आरोपी ने अपनी जमीन को निजी बताकर बेचने का प्रस्ताव रखा। आरोपी पूर्व सैनिक ने ग्राम पंधी स्थित अपनी पांच एकड़ 18 डिसमिल भूमि को निजी संपत्ति बताते हुए 10 लाख रुपये में सौदा तय किया। अप्रैल 2013 में दोनों पक्षों के बीच इकरारनामा किया गया। इसके बाद 29 मई 2014 को नियमानुसार जमीन की रजिस्ट्री भी कराई गई। रजिस्ट्री के समय सौदे के मुताबिक पूरी 10 लाख रुपये की रकम आरोपी ने प्राप्त कर ली। पीड़िता के अनुसार, रजिस्ट्री के बाद जब जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी आरोपी पूर्व सैनिक की ओर से नामांतरण पर आपत्ति दर्ज कर रोक लगवा दी गई। इससे संदेह होने पर खरीदार ने जमीन से संबंधित राजस्व अभिलेखों की जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि संबंधित जमीन सरकारी पट्टे की है, जो अहस्तांतरणीय श्रेणी में आती है और जिसका विक्रय कानूनन संभव नहीं है। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जमीन को निजी नहीं बल्कि सरकारी पट्टेदार के रूप में दर्ज बताया गया है। आरोप है कि पूर्व सैनिक ने इन महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया और धोखाधड़ी की नीयत से जमीन को निजी बताकर रजिस्ट्री कराई। बाद में नामांतरण रुकवाकर खरीदार को नुकसान पहुंचाया गया। पीड़िता ने मामले की शिकायत सिविल लाइन थाने में की, जहां जांच के बाद पुलिस ने आरोपी पूर्व सैनिक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण की विवेचना की जा रही है और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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