आईपीएस या आईएएस अवार्ड हो जाने पर अधिकारी की सेवा पृष्ठभूमि नहीं बल्कि उसकी कार्यक्षमता अनुभव और नेतृत्व क्षमता ही निर्णायक ,संविधान और सेवा नियमों की दृष्टि से सभी अधिकारियो का समान दायित्व
विष्णु देव सरकार का संदेश साफ है पद नहीं पृष्ठभूमि नहीं बल्कि परफॉर्मेंस ही निर्णायक आधार होगा,परिणाम चाहिए अपनापन तेज़ कार्रवाई अपराध पर नियंत्रण सुरक्षित शहर और जवाबदेह पुलिसिंग,जिस अधिकारी ने फील्ड में यह साबित किया है, वही सरकार की प्राथमिकता
छत्तीसगढ़ ।रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह स्पष्ट और संजीदा है। सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या सेवा पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं बल्कि ऐसे अधिकारी की नियुक्ति करना है जो राजधानी की कानून-व्यवस्था को मजबूत कर सके और जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम दे।
हाल के दिनों में कुछ तत्वों द्वारा इस व्यवस्था को सीधे यूपीएससी से चयनित आईपीएस अधिकारियों और राज्य सेवा से पदोन्नत होकर आईपीएस बने अधिकारियों के बीच खींचकर अनावश्यक विवाद पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे पूरी तरह आधारहीन और भ्रामक करार दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव सरकार की दो टूक है एक बार डीपीसी के बाद आईपीएस या आईएएस अवार्ड हो जाने पर अधिकारी की सेवा पृष्ठभूमि नहीं बल्कि उसकी कार्यक्षमता अनुभव और नेतृत्व क्षमता ही निर्णायक होती है। संविधान और सेवा नियमों की दृष्टि से सभी अधिकारी समान दायित्व और अधिकार रखते हैं।
आम जनता के लिए भी यह मुद्दा कभी प्रासंगिक नहीं रहा कि अधिकारी किस मार्ग से सेवा में आया है। जनता को केवल परिणाम चाहिए अपनापन तेज़ कार्रवाई अपराध पर नियंत्रण सुरक्षित शहर और जवाबदेह पुलिसिंग। जिस अधिकारी ने फील्ड में यह साबित किया है, वही सरकार की प्राथमिकता है और होना भी चाहिये ।
पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को तेज़ करना जवाबदेही तय करना और राजधानी में कानून-व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देना है। ऐसे में इस सुधारात्मक कदम को व्यक्तिगत या सेवा आधारित बहसों में उलझाना न केवल निरर्थक है, बल्कि व्यवस्था के मूल उद्देश्य से ध्यान भटकाने वाला भी है।विष्णु देव सरकार का संदेश साफ है पद नहीं पृष्ठभूमि नहीं बल्कि परफॉर्मेंस ही निर्णायक आधार होगा।
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