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January 12, 2026 3:33 am

बिलासपुर में रफ्तार का कहर: नाबालिग की मौत ने फिर खड़े किए सड़क सुरक्षा के सवाल,रफ्तार, रोमांच और लापरवाही: शहर कब जागेगा?

रेसिंग का जुनून और नाबालिगों के हाथ में तेज रफ्तार बाइक प्रशासनिक अपीलें, लेकिन जमीनी असर सीमित

बिलासपुर की सड़कों पर रविवार सुबह जो हुआ, वह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी वह एक चेतावनी थी। 16 वर्षीय नाबालिग की मौत ने यह साफ कर दिया है कि शहर में रफ्तार अब रोमांच नहीं बल्कि खतरे का दूसरा नाम बन चुकी है। सवाल यह नहीं है कि हादसा कैसे हुआ, सवाल यह है कि ऐसा होने दिया क्यों गया?

नाबालिग के हाथ में R15 जैसी हाई-स्पीड बाइक सड़क पर रेसिंग न निगरानी का डर और न परिणामों की चिंता यह स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई। यह वर्षों की लापरवाही, ढीली निगरानी और सामाजिक चुप्पी का नतीजा है।

बिलासपुर शहर में तेज रफ्तार और स्टंटबाजी का जुनून अब जानलेवा रूप लेता जा रहा है। रविवार सुबह सकरी थाना क्षेत्र अंतर्गत आसमा सिटी के पास हुआ दर्दनाक हादसा इसका ताजा उदाहरण है, जहां रेसिंग के दौरान एक नाबालिग की जान चली गई। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि प्रशासन अभिभावकों और समाज तीनों के लिए गंभीर चेतावनी भी है।

रविवार सुबह करीब 7 बजे प्रेम कुमार सिंह (16 वर्ष), निवासी राजकिशोर नगर, सरकंडा, अपनी R15 बाइक से तेज रफ्तार में जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह दो से तीन अन्य युवकों के साथ बाइक रेसिंग कर रहा था। अचानक संतुलन बिगड़ने से बाइक सड़क किनारे स्थित एक पान ठेले को तोड़ते हुए सीधे नाले में जा गिरी। हादसे में प्रेम गंभीर रूप से घायल हो गया।सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सकरी पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

रेसिंग का जुनून और नाबालिगों के हाथ में तेज रफ्तार बाइक

यह कोई पहला मामला नहीं है। शहर में नाबालिगों द्वारा तेज रफ्तार बाइक चलाना और स्टंट करना आम होता जा रहा है। बिना लाइसेंस, बिना सुरक्षा उपकरण और बिना भय के सड़क को रेस ट्रैक बना दिया गया है। सवाल यह भी है कि नाबालिगों को इतनी शक्तिशाली बाइक आखिर उपलब्ध कैसे हो रही हैं?

मोटर व्हीकल एक्ट के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद नाबालिगों को वाहन सौंपने की प्रवृत्ति थम नहीं रही। परिणामस्वरूप, लापरवाही की यह श्रृंखला हर कुछ दिनों में किसी न किसी परिवार को उजाड़ रही है।

प्रशासनिक अपीलें, लेकिन जमीनी असर सीमित

आईजी संजीव शुक्ला, कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह द्वारा सोशल मीडिया, समाचार पत्रों और जागरूकता वीडियो के माध्यम से लगातार सड़क सुरक्षा के संदेश दिए जा रहे हैं। पुलिस भी समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाती है। बावजूद इसके, युवाओं के एक वर्ग पर इन अपीलों का अपेक्षित असर नहीं दिख रहा। नियमित निगरानी और सख्त दंडात्मक कदमों के बावजूद स्टंटबाजी पर लगाम नहीं लग पा रही।

एक परिवार उजड़ा, कई सवाल बाकी

प्रेम अपने माता-पिता राम बाबु का इकलौता पुत्र बताया जा रहा है। सुबह की एक लापरवाही ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी की विफलता भी है जहां अभिभावकों की सतर्कता, समाज की रोक-टोक और प्रशासन की सख्ती, तीनों की परीक्षा हो रही है।

सबसे बड़ी जिम्मेदारी: अभिभावकों की

इस पूरे मामले में सबसे असहज करने वाला सवाल अभिभावकों से जुड़ा है। क्या 16 साल के बच्चे को तेज रफ्तार बाइक देना शौक है या खतरे का न्योता हर माता-पिता को यह समझना होगा कि बाइक की चाबी देना सिर्फ भरोसा नहीं बल्कि संभावित जोखिम सौंपना भी है।

आज एक परिवार ने अपना इकलौता बेटा खोया है। कल यह किसी और का घर भी हो सकता है,अब भी वक्त है

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सड़क पर रफ्तार नहीं, समझदारी जरूरी है। नाबालिगों को वाहन सौंपने से पहले अभिभावकों को सोचना होगा, और पुलिस-प्रशासन को कार्रवाई को और सख्त करना होगा।अन्यथा, हर ऐसी सुबह किसी न किसी घर में मातम लेकर आती रहेगी।

अगर सुबह 7 बजे शहर की सड़कों पर बाइक रेसिंग हो रही है, तो यह सीधे तौर पर उस थाना क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। हादसे के बाद थाना क्षेत्र के पुलिस की मौजूदगी क्यों दिखती है पहले क्यों नहीं? इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, नाबालिगों को वाहन उपलब्ध कराने और पुलिस थाना क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सख्ती जरूरी,ऐसे अभिभावकों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत

हादसों पर दुख जताना आसान है, लेकिन उन्हें रोकना कठिन पर जरूरी है।जरूरत है नाबालिगों पर शून्य सहनशीलता नीति की अभिभावकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की स्कूल-कॉलेज स्तर पर अनिवार्य ट्रैफिक जागरूकता की और स्टंटबाजी करने वालो के पिता पर कठोर कार्यवाही की ।अब सवाल ए उठता है कि हर हादसे के बाद हम कुछ दिन चर्चा करते हैं फिर भूल जाते हैं। लेकिन सवाल बना रहता है क्या अगली मौत से पहले शहर जागेगा या फिर किसी घर का चिराग इसी तरह बुझ जाएगा ।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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