केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू परिवार सहित पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने कथा श्रवण किया

बिलासपुर।श्री प्रेम सेवा परिवार के तत्वावधान में मिनोचा कॉलोनी स्थित कथा स्थल पर आयोजित विश्वविख्यात कथा वाचक जया किशोरी की नानी बाई का मायरा कथा एवं भजन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कार्यक्रम के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए।

कथा के दौरान जया किशोरी ने नरसी मेहता और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार निर्धनता के समय नरसी मेहता का साथ लोग छोड़ने लगे, मायरा ले जाने वाली बैलगाड़ी तक टूट गई, लेकिन भगवान हर स्थिति को देख रहे थे। उन्होंने कहा कि भक्ति का अर्थ केवल नाम जप नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और परिश्रम के साथ खड़े रहना है।
जया किशोरी ने कहा कि कुंडली में राजयोग लिखा होने का अर्थ यह नहीं कि बिना प्रयास सब कुछ मिल जाएगा। जीवन में परिस्थितियां आएंगी, उनका सामना करने पर ही राजयोग जैसा फल प्राप्त होता है। परीक्षा में भगवान प्रश्नपत्र नहीं बनाते, मेहनत स्वयं करनी पड़ती है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू परिवार सहित शामिल हुए। इसके अलावा प्रदेश शासन के पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने कथा श्रवण किया।
जया किशोरी ने सामाजिक विषयों पर भी संदेश देते हुए कहा कि विवाह जैसे शुभ अवसरों पर सहयोग और आनंद का भाव होना चाहिए, न कि अपेक्षाओं और नाराजगी का। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते रहे।

कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए बिजली बंद होने पर श्रद्धालुओं ने मोबाइल की रोशनी में भजन-कीर्तन किया, जिससे पूरा पंडाल भक्ति के रंग में रंग गया।
श्री प्रेम सेवा परिवार ने बताया कि 11 जनवरी को कथा का अंतिम दिन है। अंतिम दिन मायरा भरने का विशेष वर्णन किया जाएगा। सभी श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे दोपहर 2:30 बजे तक कथा स्थल पर पहुंचकर अपना स्थान ग्रहण करें। महिलाओं से पीले व लाल वस्त्र धारण कर आने का भी आग्रह किया गया है।

कथा के समापन अवसर पर श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भजन-कथा का लाभ लेने की अपील की गई है।
प्रधान संपादक

