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January 12, 2026 4:55 am

बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव : पंजीयक पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई का आरोप,चुनाव विवादों के घेरे में

रजिस्ट्रार और सहायक पंजीयक की भूमिका पर सवाल, चुनाव प्रक्रिया को बताया नियम विरुद्ध

चमकाने धमकाने का खेल शुरू , कभी कोल डिपो के मुंशी रहे कैसे बन गए बिलासपुर प्रेस क्लब का सदस्य जाँच जरूरी , किसने बनाया क्यो बनाया वही लोग ख़राब कर रहे है प्रेस क्लब की छवि ,विस्तृत रिपोर्ट अगले अंक में

बिलासपुर।बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनाव को निरस्त किए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि फर्म एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग के सहायक पंजीयक ज्ञान साहू तथा छत्तीसगढ़ की रजिस्ट्रार पद्मिनी भी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर 19 सितंबर 2025 को संपन्न हुए प्रेस क्लब चुनाव को रद्द कर दिया, जबकि कानून में ऐसा करने का अधिकार रजिस्ट्रार को नहीं है।

प्रेस क्लब का दो वर्षीय कार्यकाल (2023–25) समाप्त होने से पूर्व 7 सितंबर 2025 को सामान्य सभा आयोजित की गई थी। बैठक में आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया गया तथा सदस्यों की मांग पर सर्वसम्मति से वरिष्ठ सदस्य महेश तिवारी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया। इसके बाद 9 सितंबर को चुनाव अधिसूचना जारी कर प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित की गई। 10 सितंबर को दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। चुनाव कार्यक्रम और मतदाता सूची फर्म एवं संस्थाएं कार्यालय में विधिवत जमा कर उसकी पावती भी ली गई।

बताया गया कि मतदाता सूची को लेकर चार व्यक्तियों द्वारा सहायक पंजीयक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई। इनमें से दो व्यक्ति संस्था से असंबंधित बताए जा रहे हैं, जबकि दो सदस्य चुनाव में प्रत्याशी के रूप में शामिल थे। आरोप है कि शिकायतकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के दौरान प्रचार भी किया। शिकायतों के आधार पर सहायक पंजीयक द्वारा जांच शुरू की गई, जिसे अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 (संशोधित 1998) की धारा 32 के अनुसार, किसी संस्था के विरुद्ध जांच तभी की जा सकती है जब शासी समिति के अधिकांश सदस्यों के शपथपत्र युक्त शिकायत या संस्था के कम से कम एक-तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर युक्त शपथपत्र प्रस्तुत किए जाएं। आरोप है कि प्रेस क्लब के मामले में इन शर्तों का पालन नहीं किया गया। पूर्व में उच्च न्यायालय द्वारा भी कोरम पूरा न होने की स्थिति में की गई कार्रवाई को अवैध ठहराया जा चुका है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि चुनाव संपन्न होने के बाद भी चुनाव अधिकारी को नोटिस जारी किए गए, जबकि नियमानुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव अधिकारी की भूमिका समाप्त हो जाती है और जिम्मेदारी निर्वाचित कार्यकारिणी की होती है। इसके बावजूद निर्वाचित अध्यक्ष दिलीप यादव को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।

इधर, रजिस्ट्रार द्वारा 18 नवंबर 2025 को दस्तावेज तलब कर 19 सितंबर को हुए चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया गया। जबकि नियमों के अनुसार किसी भी चुनाव परिणाम को निरस्त करने के लिए विधिवत इलेक्शन पिटिशन आवश्यक होती है और चुनाव को निरस्त करने का अधिकार केवल न्यायालय को है।

धारा 32 के प्रावधानों के अनुसार रजिस्ट्रार वित्तीय अनियमितता, गठन में गड़बड़ी या अव्यवस्था की जांच कर सकता है और पुष्टि होने पर शासी निकाय का विघटन किया जा सकता है, लेकिन चुनाव निरस्त करने का अधिकार अधिनियम में नहीं दिया गया है। इस आधार पर आरोप लगाया जा रहा है कि प्रेस क्लब की स्वायत्तता में हस्तक्षेप किया गया है।

मामले को लेकर प्रेस क्लब के सदस्यों में नाराजगी है और इसे न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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