बिलासपुर। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह की शुरुआत गुरुवार को चेतना हाल में भव्य कार्यक्रम के साथ हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन संभागायुक्त सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक संजीव शुक्ला, कलेक्टर संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल एवं नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में एसएसपी रजनेश सिंह ने जिले की यातायात व्यवस्था पर आधारित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों में 61 की कमी आई है, जो लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। यह उपलब्धि खतरनाक सड़क खंडों एवं ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां इंजीनियरिंग सुधार, साइन बोर्ड लगाने, स्पीड कंट्रोल उपायों और सतत निगरानी के चलते संभव हो पाई है। एसएसपी ने इसे यातायात पुलिस, प्रशासन और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया। आईजी संजीव शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर में सर्वाधिक कमी बिलासपुर जिले में दर्ज की गई है, जो जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने शहर की यातायात व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए शहर को सेक्टरों में विभाजित कर नागरिकों को पुलिस के साथ सहयोगी जिम्मेदारी सौंपने पर जोर दिया। उनका कहना था कि जब आमजन यातायात नियमों को अपनी जिम्मेदारी समझकर पालन करेंगे, तभी सड़क हादसों में स्थायी कमी आएगी। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवी संगठनों द्वारा यातायात जागरूकता सप्ताह चलाने और सड़क सुरक्षा पर आधारित लघु फिल्मों के निर्माण के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। इन फिल्मों में अभिनय करने वाले कलाकारों, जिनमें सेवानिवृत्त एसआई उमाशंकर पांडेय, नरेंद्र सिंह चंदेल सहित अन्य कलाकार शामिल थे, को भी सम्मान प्रदान किया गया। अंत में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा माह के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न अभियानों में आमजन की सक्रिय सहभागिता बेहद आवश्यक है। उन्होंने जनवरी 2026 में आयोजित होने वाली विशाल हेलमेट जागरूकता बाइक रैली में अधिक से अधिक लोगों से भाग लेने की अपील की। इस अवसर पर यातायात उपकरणों की प्रदर्शनी, जागरूकता पोस्टर और फ्लैक्स लगाए गए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, शिक्षाविद, विभिन्न सुरक्षा निकायों के सदस्य, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, विद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षक-छात्र तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
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