Explore

Search

March 12, 2026 9:46 am

शताब्दी के जश्न में डूबा बिलासपुर रेलवे स्टेशन 

बिलासपुर।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का प्रमुख जंक्शन बिलासपुर रेलवे स्टेशन के सौ वर्ष पूरे होने पर शताब्दी के जश्न में पूरी तरह सराबोर नज़र आया बिलासपुर रेलवे स्टेशन।

छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और व्यस्ततम यह स्टेशन हावड़ा मुंबई मुख्य मार्ग और कटनी रूट पर एक अहम कड़ी है। यहां प्रतिदिन करीब 70 हजार यात्री और लगभग 350 यात्री व मालगाड़ियां संचालित होती हैं।

स्टेशन की स्थापना 1889 में नागपुर छत्तीसगढ़ रेलवे के तहत हुई थी जो बाद में बंगाल नागपुर रेलवे का हिस्सा बना। 1891 में नागपुर से आसनसोल तक लाइन शुरू होने के साथ यह देश के प्रमुख क्रॉस-कंट्री मार्ग पर अहम ठिकाना बन गया। 1969-70 में राऊरकेला बिलासपुर सेक्शन 1976-77 में बिलासपुर नागपुर सेक्शन और 1981 में बिलासपुर कटनी सेक्शन का विद्युतीकरण हुआ।

स्टेशन का पुराना भवन हेरिटेज धरोहर के रूप में संरक्षित है। 1918 में विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर यहां छह घंटे रुके थे और इसी दौरान उन्होंने प्रसिद्ध कविता फांकी लिखी थी।

रेलवे ने खेलों में भी बिलासपुर को पहचान दिलाई है जहां से कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उभरे हैं। आर्थिक दृष्टि से स्टेशन ने होटलन परिवहन हैंडलूम और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा दिया है। यह अचानकमार टाइगर रिजर्व महामाया मंदिर रतनपुर और चैतुरगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों का प्रवेश द्वार भी है।

यात्री सुविधाओं में स्टेशन को स्वच्छता सुरक्षान दिव्यांग सुविधाओं आधुनिक टिकटिंग प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहचान मिली है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत यहां 22 एस्केलेटर, 30 लिफ्ट, 28 हजार वर्ग मीटर पार्किंग, 2000 किलोवाट सौर ऊर्जा और 400 सीसीटीवी कैमरे सहित विश्वस्तरीय पुनर्विकास कार्य चल रहे हैं।

SECR  के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार का कहना है कि ये कार्य स्टेशन को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल बनाएंगे। बिलासपुर स्टेशन को अतीत की विरासत और भविष्य की आधुनिकता का संगम बताया जा रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

Advertisement Carousel
CRIME NEWS

BILASPUR NEWS