अब चलेगा तोल–मोल के बोल
कैबिनेट मीटिंग में एक बड़ा फैसला हुआ। तीन साल से तबादले पर रोक को सीएम विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली कैबिनेट ने हटाने का फैसला ले लिया है। ट्रांसफर से बैन तो हटाया है पर इसके लिए टाइम लिमिट भी तय कर दिया है। लंबे अरसे बाद बैन हटने से कर्मचारी संघ से लेकर मंत्री और अफसर खुश नजर आ रहे हैं। खुशी की बात भी है। मनमाफिक जगह पर पोस्टिंग करा पाएंगे। यह सब तो ठीक है, पर इसके आगे जो कुछ होगा इससे सरकार की भद्द पीटे बिना नहीं रहेगा। आमतौर पर तो यही बात सामने आती है कि तबादला प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी फैसले से ऊपर बिजनेस का रूप ले लेता है। चलिए आगे-आगे देखते हैं होता क्या है। वैसे भी सीएम ने जीरो टालरेंस की पालिसी पर अमल करने सबको पहले से ही हिदायत दे रखी है। चर्चा तो अभी से ही इस बात की होने लगी है कि भैया के करीबी डिपार्टेमेंट लिस्ट बनाने में पहले दिन से ही बिजी हो गए हैं। कर्म ही पूजा को स्मरण करते हुए कर्म करने में जुट गए हैं। देखिए किस हिसाब से पूजा होती है और चढ़ावा में क्या कुछ मिलता है।
आबकारी विभाग के अफसरों ने दिला दी लापतागंज की याद
आबकारी विभाग की अपनी अहम जिम्मेदारी है। शराब दुकानों का जब ठेका हुआ करता था और ठेकेदार शराब दुकान अपने हिस्से करने मशक्कत करते थे,उस दौर के इस विभाग के अफसरों का जलवा ही कुछ और रहता था। ठेकेदारो की परिक्रमा चलते ही रहती थी। ठेके बंद तो परिक्रमा भी बंद। पर काम कम नहीं हुआ है। काम तो करना ही पड़ेगा। ये बात अलग है कि दुकानें सरकार चला रही है तो जलवा और रसूख में अंतर भी आया है। तभी तो आबकारी विभाग का दफ्तर इन दिनों लापतागंज बन गया है। विभाग का काम पुलिस के कंधे पर आ पड़ा है। लापतागंज के किरदारों की खबर लेनी भी तो जरुरी है। भारी भरकम अमला और रौबदाब विभाग के रहने का मतलब भी निकलना चाहिए ना। मुफ्त की रोटी तो यूं हजम होने वाली भी नहीं है। हजम करना है तो काम भी तो दिखाना पड़ेगा ना। बहरहाल काम करे या ना करें,पर इन दिनों इस विभाग की चर्चा जमकर हो रही है।
इस बार कुछ अच्छा ही होने वाला है

मानसून की आहट सुनाई देने लगी है। मौसम ने करवट बदलना शुरू कर दिया है। बारिश की बौछार के बीच अब हरियाली बिछाने की कवायद भी शुरू होने वाली है। नए कलेक्टर ने पौधारोपण को लेकर जिस तरह दिलचस्पी और कड़ाई दिखाई है,इससे तो यही लगने लगा है कि इस बार कुछ अच्छा होने वाला है। बिलासपुर जिले के लिए कलेक्टर नए नहीं है। एसडीएम की अच्छी पारी उन्होंने यहां खेली है। जिले से अच्छी तरह वाकिफ हैं। तभी तो उनको कहना पड़ा,पौधारोपण के लिए जितना जिनको टारगेट दिया जाएगा उतना मौके पर करके दिखाना होगा। जाहिर सी बात है वे मौके पर भी जाएंगे और टारगेट पर नजर भी रखेंगे। थोड़ी सी कड़ाई से सिस्टम दुरुस्त हो जाए तो इससे अच्छ और क्या हो सकता है।
ये डिजिटल क्रांति का दौर है
जी हां आप सही समझे, ये दौर तो डिजिटल क्रांति का ही है। हो भी क्यों ना। केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया का छत्तीसगढ़ प्रेम जगजाहिर है। सरगुजा के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या से आम से लेकर खास और इसमें भी यूथ सबसे ज्यादा परेशान थे। परेशानी को देखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व विधायक ने मंत्री सिंधिया से बात की। मंत्री ने ना केवल हामी भरी सर्वे भी करा दिया। अब वह दिन दूर नहीं जब आदिवासी बहुल भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के 83 गांवों को अब हाई-स्पीड 4G इंटरनेट की सुविधा मिलने लगेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री व मौजूदा एमएलए को साथ काम करने का फायदा मिला। यह फायदा अब आम से लेकर खास और युवाओं को मिलने लगेगा। वाकई डिजिटल क्रांति का दौर है जो चमकदार दिखाई दे रहा है।
अटकलबाजी
पौधारोपण के लिए टारगेट देने के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल को यह क्यों कहना पड़ा कि इस बार वे मौके पर जाएंगे और जिनको जो टारगेट दिया है उससे गिनती भी गिनवाएंगे।
कैबिनेट मीटिंग में ट्रांसफर से बैन हटने की घोषणा के बाद किनके-किनके बंगलों पर अफसर से लेकर कर्मचारियों और लोगों की भीड़ उमड़ेगी। वे कौन लोग हैं जो अभी से ही विभागवार सूची बनाने में जुट गए हैं।
प्रधान संपादक


