बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में फोरेंसिक एक्सपर्ट की नियुक्ति, लैब व जरुरी संसाधन मुहैया कराने की मांग को लेकर दायर याचिका की सुनवाई डिवीजन बेंच में हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फोरेंसिक एक्सपर्ट ना होने को गंभीरता से लेते हुए चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 9 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।
शिरीन मालेवर ने अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल और रुद्र प्रताप दुबे के माध्यम से बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ में फोरेंसिक एक्सपर्ट की नियुक्ति करने और जरुरी संसाधन मुहैया कराने की मांग की है। बीते सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने डिवीजन बेंच को बताया था कि देश के 16 शहरों में केंद्र सरकार ने फोरेंसिक एक्सपर्ट की नियुक्ति की है।

छत्तीसगढ़ में अब केंद्र सरकार की ओर से फोरेंसिक एक्सपर्ट की नियुक्ति नहीं की गई है। बीते सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। जवाब ना आने पर कोर्ट ने समय देते हुए शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने कहा है। याचिका की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) का हवाला देते हुए बताया कि इलेक्ट्रानिक अभिलेखों के प्रमाणीकरण के लिए जरुरी संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79-ए के तहत राज्य में कोई प्रमाणित डिजिटल फोरेंसिक एक्सपर्ट ना होने के कारण मामलों में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
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