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October 1, 2026 7:20 pm

विदेशी नंबर से घंटी… उधर से गैंगस्टर की धमकी, इधर खाते से उड़ रहे पैसे

“+44, +1 और वर्चुअल नंबरों से साइबर ठगों का नया खेल; डर का माहौल बनाकर कर रहे वसूली, एसपी गौरव राय ने किया अलर्ट,विदेशी नंबर देखकर न हों भ्रमित”

CBN36 बलौदाबाजार। मोबाइल की स्क्रीन पर अनजान विदेशी नंबर चमकता है। कॉल रिसीव करते ही दूसरी तरफ से भारी आवाज में धमकी मिलती है-तुम्हारे खिलाफ मामला है… गैंगस्टर से पंगा लिया है… पैसे नहीं दिए तो अंजाम भुगतना पड़ेगा।घबराए व्यक्ति को सोचने तक का मौका नहीं दिया जाता। कुछ ही मिनट में उससे पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है।

यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि साइबर ठगी का नया पैंतरा है

साइबर अपराधी अब स्थानीय लोगों को डराने के लिए इंटरनेशनल और वर्चुअल नंबरों का सहारा ले रहे हैं। +44, +1 जैसे विदेशी कोड वाले नंबरों से कॉल कर कभी खुद को गैंगस्टर बताया जा रहा है तो कभी पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी। निशाना एक ही-डर पैदा करो और उसी डर में पैसा निकलवा लो।

पहले डर, फिर डील… यही है ठगों का खेल

ठगी का पूरा खेल मनोवैज्ञानिक दबाव पर टिका है। कॉल करने वाला ऐसी कहानी गढ़ता है जिससे सामने वाला घबरा जाए। कभी फर्जी केस में फंसाने की बात, कभी गिरफ्तारी का डर और कभी किसी अपराधी गिरोह का नाम लेकर धमकी।इसके बाद ठग समाधान भी खुद ही बताते हैं-इतने रुपये भेज दो, मामला खत्म कर देंगे।घबराया व्यक्ति कई बार यह तक जांच नहीं करता कि कॉल करने वाला वास्तव में कौन है। यहीं से ठगी का रास्ता खुल जाता है।

विदेशी नंबर देखकर न हों भ्रमित

पुलिस के मुताबिक किसी कॉल का विदेशी नंबर से आना इस बात का प्रमाण नहीं है कि कॉल करने वाला वास्तव में विदेश में बैठा है। इंटरनेट आधारित तकनीक और वर्चुअल नंबरों के जरिए ठग अपनी पहचान को लेकर भ्रम पैदा कर सकते हैं।

इसलिए +44, +1 या किसी अन्य विदेशी नंबर को देखकर न डरें और न ही उसे किसी बड़े अधिकारी या अपराधी की कॉल मान लें।

एसपी गौरव राय बोले-डर आपकी सबसे बड़ी कमजोरी, जागरूकता सबसे बड़ा हथियार

पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने जिलेवासियों को ऐसे साइबर अपराधों से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अनजान नंबर से आने वाली धमकी भरी कॉल पर घबराकर कोई आर्थिक लेनदेन नहीं करना चाहिए। कोई व्यक्ति खुद को गैंगस्टर, पुलिस अधिकारी या किसी सरकारी एजेंसी से जुड़ा बताकर पैसे मांगता है तो उसकी बातों पर भरोसा करने के बजाय पहले सत्यापन करें।

एसपी ने लोगों से यह भी अपील की कि ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक खाते की जानकारी, कार्ड संबंधी विवरण अथवा अन्य निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।

ठगों के निशाने पर आते ही ये गलती न करें

तुरंत पैसे भेजना

धमकी सुनकर जल्दबाजी में भुगतान करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।

ओटीपी बता देना

बैंक या यूपीआई से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी को न दें।

कॉलर की पहचान पर भरोसा करना

सिर्फ वर्दी, नाम, नंबर या पद बताने से कोई अधिकारी साबित नहीं हो जाता।

परिवार से बात न करना

ठग अक्सर पीड़ित को अकेले दबाव में रखने की कोशिश करते हैं।

शिकायत में देरी करना

ठगी होने पर हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है।

एक नंबर याद रखें-1930

यदि साइबर ठगी हो गई है तो घबराकर चुप बैठने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। साथ ही संबंधित बैंक/वित्तीय संस्था और पुलिस को भी तत्काल सूचना दें।

धमकी की आवाज असली हो सकती है, लेकिन कहानी फर्जी

साइबर ठगों का हथियार अब सिर्फ फर्जी लिंक या ओटीपी नहीं रह गया है। वे लोगों की भावनाओं और डर को निशाना बना रहे हैं। गैंगस्टर का नाम, पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय-इन सबको जोड़कर ऐसा दबाव बनाया जाता है कि पीड़ित बिना जांच-पड़ताल किए पैसा भेज दे।

इसलिए अगली बार मोबाइल पर अनजान विदेशी नंबर से कॉल आए और सामने वाला धमकाने लगे तो याद रखें-फोन काटना नुकसान नहीं है, लेकिन डरकर पैसा भेजना भारी पड़ सकता है।

पुलिस की अपील

डरिए नहीं, सत्यापन कीजिए। धमकी में पैसा मत दीजिए। ओटीपी और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा मत कीजिए। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें।सतर्क रहें। सुरक्षित रहें। साइबर ठगों के डर को अपनी कमजोरी न बनने दें।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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