CBN36 रायपुर। सिंधी समाज सनातन परंपराओं के अनुरूप पूज्य शंकराचार्यों के मार्गदर्शन में देश में धर्म आधारित शासन व्यवस्था की स्थापना के लिए चलाए जा रहे अभियान में सक्रिय भूमिका निभाए। यह आह्वान मसंद सेवाश्रम के पीठाधीश साईं जलकुमार मसंद साहिब ने लखनऊ में आयोजित सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक में किया।
साईं मसंद ने कहा कि भारत की प्राचीन शासन व्यवस्था सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित रही है। यथा राजा तथा प्रजा के सिद्धांत के अनुरूप भारत ने लंबे समय तक विश्वकल्याण की दिशा में कार्य किया और विश्वगुरु की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि देश में धर्म और सदाचार आधारित व्यवस्था मजबूत होने से समाज में शांति, व्यवस्था और लोककल्याण को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश में धर्म आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से पूज्य शंकराचार्यों और संतों के मार्गदर्शन में अभियान चलाया जा रहा है। भारत के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले हिंदू समाज के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं। उन्होंने सिंधी समाज से अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
लखनऊ में आयोजित हुई बैठक
साईं मसंद ने यह बात लखनऊ स्थित शिव शांति संत आसूदाराम आश्रम में आयोजित सत्संग एवं सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कही। वे चारों शंकराचार्यों की अध्यक्षता में गठित अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन परम धर्म संसद 1008 के संगठन मंत्री भी हैं। उन्होंने बताया कि देश में धर्म आधारित शासन व्यवस्था की स्थापना के लिए यह अभियान सितंबर 2012 से चलाया जा रहा है।
सिंधी समाज के योगदान का उल्लेख
साईं मसंद ने कहा कि सिंधी समाज का धर्म, देश और लोककल्याण के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े शोधों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन पाषाण लिपि में वैदिक शास्त्रों की ऋचाओं से संबंधित प्रमाण मिलने की बात सामने आई है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में सिंधी व्यापारी जलमार्ग से विभिन्न देशों में व्यापार के लिए जाते थे। उनके माध्यम से सनातन वैदिक संस्कृति और जीवनशैली का भी विभिन्न क्षेत्रों में प्रसार हुआ। इस तरह सिंधी समाज ने भारतीय संस्कृति के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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