Explore

Search

September 30, 2026 4:34 pm

हिंदी विश्वविद्यालय में शहीद बाजी राउत की विरासत पर कार्यशाला, रक्तदान व स्वच्छता कार्यक्रम

बाजी राउत का बलिदान इतिहास का प्रकाशमान स्तंभ : कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा

CBN36 वर्धा, 30 सितंबर 2026। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में शहीद बाजी राउत की विरासत और युवा प्रेरणा को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन के तहत कार्यशाला एवं युवा संवाद का आयोजन किया गया। वहीं, विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस और ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत गुरुवार को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

‘शहीद बाजी राउत की विरासत पर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन : राष्ट्र-निर्माण हेतु युवा अभिप्रेरण’ के अंतर्गत सोमवार, 28 सितंबर को महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित कार्यशाला में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि बाजी राउत का बलिदान इतिहास का प्रकाशमान स्तंभ है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर 1938 में ढेंकानाल रियासत के प्रजामंडल आंदोलन के दौरान 12 वर्षीय नाविक बालक बाजी राउत ने ब्राह्मणी नदी के घाट पर रियासत की पुलिस को नाव देने से इनकार कर दिया और अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

कुलपति ने कहा कि एक किशोर का अपने दायित्व पर अडिग रहना राष्ट्रवाद के उस स्वरूप को सामने लाता है, जो कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक साहस से जन्म लेता है। यही उत्तरदायी नागरिकता और युवा नेतृत्व का आधार है। उन्होंने इतिहास और साहित्य के संबंध पर चर्चा करते हुए कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि स्मृति और अर्थ के निर्माण की प्रक्रिया भी है। साहित्य उन आवाजों को स्वर देता है, जो अभिलेखों में दर्ज नहीं हो पाईं। उन्होंने बाजी राउत की जन्म शताब्दी, 5 अक्तूबर 2026, का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से अपने-अपने क्षेत्रों के गुमनाम नायकों की खोज करने का आह्वान किया।

भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के तत्वावधान और ओडिशा अनुसंधान केंद्र (ORC) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में 50 से अधिक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। इसका केंद्रीय विषय ‘युवा शौर्य और स्वतंत्रता संग्राम : शहीद बाजी राउत एवं हमारे क्षेत्र के गुमनाम नायक’ रहा।

कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने शहीद बाजी राउत के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर पाण्डेय ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने साहित्य और इतिहास के बीच गुमनाम नायकों की तलाश पर विचार रखे। कुलानुशासक डॉ. राकेश मिश्र ने प्रजामंडल आंदोलन की पृष्ठभूमि में बाजी राउत के बलिदान और इतिहास लेखन की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला।

द्वितीय सत्र में निबंध लेखन प्रतियोगिता की चयनित प्रविष्टियों का प्रस्तुतीकरण हुआ। विद्यार्थियों ने बाजी राउत के साथ-साथ अपने-अपने क्षेत्रों के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों पर शोधपरक प्रस्तुतियां दीं। तृतीय सत्र में युवा संवाद हुआ। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर सिदो-कान्हू मुर्मू दलित एवं जनजातीय अध्ययन केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बालाजी चिरडे ने देशी रियासतों के विलय और स्वतंत्रता संग्राम के अन्य गुमनाम नायकों की चर्चा की। डॉ. योगेंद्र बाबू ने आभार ज्ञापित किया। कार्यशाला के आयोजन में डॉ. हरीश पाण्डेय, डॉ. दत्तूराम देवुने और डॉ. देवेंद्र कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

गुरुवार को रक्तदान शिविर और स्वच्छता अभियान

विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर गुरुवार, 1 अक्तूबर को धन्वंतरि चिकित्सालय में सुबह 10 बजे से रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार आयोजित इस शिविर में रक्तदान की शपथ भी दिलाई जाएगी। इस वर्ष राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मानवता की एक बूंद। रक्तदान करें। जीवन बचाएं।’ विषय पर केंद्रित है।

इसी दिन विश्वविद्यालय में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम भी होंगे। सुबह 7 बजे से कारला चौक परिसर में घोषवाक्य लेखन, ‘एक पेड़ मां के नाम’, स्वच्छता रैली तथा ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के तहत स्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से इन कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।

सम्मेलन के अंतर्गत परिणाम घोषणा, पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह 2 अक्तूबर को सुबह 10:30 बजे महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित किया जाएगा।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

Advertisement Carousel
CRIME NEWS

BILASPUR NEWS