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September 24, 2026 9:10 pm

थाड़पथरा में 90 विद्यार्थियों ने जानी बैगा संस्कृति, समझा ग्रामीण पर्यटन का मॉडल

विश्व पर्यटन सप्ताह में आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों ने जंगल, अमरावती गंगा और ‘माई का मंडप’ तक किया ट्रैकिंग अनुभव

समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल और स्थानीय आजीविका की संभावनाओं को करीब से समझा

CBN36 रायपुर, 24 सितंबर 2026। विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम पंचायत थाड़पथरा स्थित मडहाउस परिसर में ‘रूरल एंड ट्राइबल टूरिज्म वर्कशॉप एवं फील्ड विजिट’ का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 90 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं के साथ स्थानीय संस्कृति और समुदाय आधारित पर्यटन की अवधारणा से परिचित कराना था।

जंगल और अमरावती गंगा से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग

फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक परिवेश से होते हुए कमरापथरा मार्ग से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग की। प्राकृतिक हरियाली और शांत वातावरण के बीच विद्यार्थियों ने पर्यटन के व्यावहारिक पहलुओं को समझा।

विद्यार्थियों ने जाना कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण करते हुए पर्यटन गतिविधियों को विकसित किया जा सकता है। इस दौरान जिम्मेदार पर्यटन और स्थानीय संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

बैगा संस्कृति और परंपराओं से हुए रूबरू

विद्यार्थियों ने बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान और गोदना परंपरा को करीब से जाना। स्थानीय समुदाय के साथ संवाद के दौरान उन्हें प्रकृति के साथ बैगा समुदाय के पारंपरिक जुड़ाव और ज्ञान को समझने का अवसर मिला।

विद्यार्थियों ने यह भी समझा कि जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित न रखकर स्थानीय लोकजीवन, खान-पान, कला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा सकता है।

स्थानीय व्यंजनों से कराया परिचय

थाड़पथरा पर्यटन समिति की ओर से विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने उन्हें स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण खान-पान और जीवनशैली की विशेषताओं को भी समझा।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी से विद्यार्थियों को यह अनुभव हुआ कि पर्यटन में ग्रामीणों की भूमिका केवल आतिथ्य तक सीमित नहीं है। स्थानीय संस्कृति, भोजन, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में समुदाय की सक्रिय भूमिका पर्यटन को विशिष्ट स्वरूप दे सकती है।

समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की दी जानकारी

कार्यक्रम में पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक श्री अभिषेक जायसवाल और पर्यटन समन्वयक श्री हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के विकास के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता जरूरी है। इससे स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने तथा रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं।

विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, सामुदायिक भागीदारी, जिम्मेदार पर्यटन और ग्रामीण-जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया।

पर्यटन शिक्षा को मिला व्यावहारिक आयाम

विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर आयोजित यह फील्ड विजिट विद्यार्थियों के लिए पर्यटन प्रबंधन की पुस्तकीय जानकारी को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर बना। प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को व्यावहारिक रूप से समझा।

कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. रोहित रविंद्र बोरलिकर, डॉ. जयप्रकाश नारायना एवं डॉ. दिनेश कुमार परस्ते के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में थाड़पथरा पर्यटन समिति के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही।

सीखने और अनुभव का केंद्र बना थाड़पथरा

विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 90 विद्यार्थियों ने प्राकृतिक परिवेश के बीच बैगा संस्कृति, स्थानीय परंपराओं और समुदाय आधारित पर्यटन की अवधारणा को करीब से समझा। कार्यक्रम ने पर्यटन शिक्षा को स्थानीय अनुभव से जोड़ने के साथ ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को समझने का अवसर दिया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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