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September 6, 2026 11:41 pm

पुलवामा से जांजगीर तक… एसपी विजय पाण्डेय की पहल से 16 जिंदगियों की घर वापसी

तीन साल से ईंट भट्ठे में फंसे थे 4 परिवार, मजदूरी का पैसा नहीं देने और बंधक बनाकर काम कराने का आरोप; खबर मिलते ही SP ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से साधा संपर्क, अपने खर्चे पर ट्रेन से जांजगीर लाई पुलिस

CBN36 जांजगीर-चांपा। हजारों किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में मुश्किल हालात में फंसे चार मजदूर परिवारों के लिए जांजगीर-चांपा पुलिस उम्मीद बनकर सामने आई। करीब तीन साल पहले रोजगार की तलाश में घर छोड़कर गए इन परिवारों के 16 सदस्य जब रविवार को सुरक्षित जांजगीर पहुंचे तो लंबे इंतजार के बाद उनके चेहरों पर घर लौटने की खुशी दिखाई दी। इस पूरी कवायद के पीछे एसपी विजय कुमार पाण्डेय (IPS) की त्वरित पहल और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ किया गया समन्वय अहम रहा।

मामला सामने आते ही एसपी विजय पाण्डेय ने इसे महज दूसरे राज्य में मजदूरों से जुड़ा विवाद मानकर छोड़ने के बजाय तत्काल संज्ञान लिया। जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क स्थापित कराया गया और पुलवामा में फंसे मजदूर परिवारों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई शुरू हुई। आखिरकार चार परिवारों के बच्चों सहित कुल 16 सदस्यों को वहां से सुरक्षित मुक्त कराया गया।

रोजगार की तलाश ले गई थी पुलवामा, फिर मुश्किल हुआ लौटना

पुलिस के मुताबिक, करीब तीन वर्ष पहले बम्हनीडीह थाना क्षेत्र के ग्राम कपिस्दा निवासी नरेश बंजारे, पवन बंजारे, मधु खडेल तथा सक्ती जिले के बाराद्वार निवासी संतोष टंडन रोजगार की तलाश में एक व्यक्ति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। वहां वे पुलवामा क्षेत्र के एक ईंट भट्ठे में मजदूरी करने लगे।

पीड़ितों का आरोप है कि ईंट भट्ठा मालिक काम कराने के बावजूद मजदूरी का भुगतान नहीं कर रहा था। इतना ही नहीं, उन्हें बंधन में रखकर जबरन काम भी कराया जा रहा था। परिवारों के साथ बच्चे भी वहां मौजूद थे।

इसी बीच नरेश बंजारे किसी तरह अपने परिचित जवाहर टंडन से फोन पर संपर्क करने में सफल हुए और अपनी परेशानी बताई। जवाहर ने इसकी जानकारी भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष राम स्वरूप आजाद को दी। इसके बाद प्रदेश महासचिव कलेश्वर खूंटे तक मामला पहुंचा।

कलेश्वर खूंटे अपनी टीम के साथ सीधे एसपी विजय कुमार पाण्डेय के पास पहुंचे और पुलवामा में फंसे परिवारों की पूरी स्थिति बताई।

एसपी ने सुनी फरियाद और तत्काल शुरू हुआ समन्वय

मामले की गंभीरता और परिवारों की स्थिति को देखते हुए एसपी विजय पाण्डेय ने तत्काल जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क और समन्वय स्थापित कराया। वहां की पुलिस के सहयोग और आवश्यक कार्रवाई के बाद चारों परिवारों के कुल 16 सदस्यों को सकुशल मुक्त कराया गया।

लेकिन जांजगीर-चांपा पुलिस की पहल यहीं खत्म नहीं हुई। सुरक्षित निकाले जाने के बाद इन परिवारों को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी पुलिस ने उठाई। पुलिस ने अपने खर्चे पर ट्रेन से सभी 16 लोगों के जांजगीर आने की व्यवस्था की।

जांजगीर पहुंचे तो एएसपी यूलैंडन यार्क ने खुद जाना हाल

ट्रेन से जांजगीर पहुंचने के बाद एसपी के निर्देशन में एएसपी डॉ. यूलैंडन यार्क ने परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इसके बाद सभी को पुलिस बस में सम्मानपूर्वक बैठाकर उनके गृह ग्रामों के लिए रवाना किया गया।

करीब तीन साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकले परिवार जब सुरक्षित वापस लौटे तो परिजनों के चेहरों पर भी राहत और खुशी नजर आई।

वर्दी का मानवीय चेहरा भी आया सामने

पुलवामा से 16 लोगों की सकुशल घर वापसी की यह पूरी कार्रवाई जांजगीर-चांपा पुलिस की मानवीय पहल की मिसाल भी बनी। शिकायत सामने आने के बाद एसपी विजय पाण्डेय ने जिस तेजी से दूसरे राज्य की पुलिस से समन्वय स्थापित कराया और फिर परिवारों को अपने खर्चे पर जांजगीर तक पहुंचाने की व्यवस्था की, उससे पुलिस की संवेदनशील भूमिका सामने आई।कानून-व्यवस्था संभालने वाली वर्दी जब संकट में फंसे परिवारों की घर वापसी का जरिया बनी, तो करीब तीन साल से चला आ रहा इंतजार भी आखिरकार खत्म हो गया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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