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September 6, 2026 11:22 pm

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर से माल ढुलाई को मिली रफ्तार, रोज चल रहीं 435 मालगाड़ियां

2,843 किमी के हाई कैपेसिटी रेल नेटवर्क से तेज और भरोसेमंद परिवहन को बढ़ावा

CBN36 नई दिल्ली, 6 सितंबर। देश में माल परिवहन को तेज, कुशल और भरोसेमंद बनाने में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (डीएफसी) अहम भूमिका निभा रहा है। मालगाड़ियों के लिए विकसित इस विशेष रेल नेटवर्क से जहां माल ढुलाई की क्षमता बढ़ी है, वहीं पारंपरिक रेल मार्गों पर यात्री ट्रेनों के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हुई है।

देश में वर्तमान में कुल 2,843 किलोमीटर लंबा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर नेटवर्क परिचालन में है। इसमें 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर न्यू सहनेवाल (पंजाब) से न्यू सोननगर (बिहार) तक और 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर न्यू दादरी (उत्तर प्रदेश) से न्यू जेएनपीटी (महाराष्ट्र) तक फैला है।

जेएनपीटी तक निर्बाध पहुंच

पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे का करीब 102 किलोमीटर लंबा वैतरणा-जेएनपीटी खंड 31 मार्च 2026 को पूरा होने के बाद पूरा कॉरिडोर परिचालन में आ गया। इसके साथ डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों समेत मालगाड़ियों की जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक निर्बाध आवाजाही संभव हुई है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक और उपभोग केंद्रों का पश्चिमी समुद्री व्यापार मार्ग से संपर्क और मजबूत हुआ है।

अब तक 5.21 लाख मालगाड़ी फेरे

31 अगस्त 2026 तक डीएफसी नेटवर्क पर करीब 5.21 लाख मालगाड़ी फेरे संचालित किए जा चुके हैं। नेटवर्क पर रोजाना औसतन 435 मालगाड़ियां चल रही हैं। इस दौरान करीब 658 अरब सकल टन किलोमीटर (जीटीकेएम) और करीब 360 अरब नेट टन किलोमीटर (एनटीकेएम) माल परिवहन दर्ज किया गया।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में डीएफसी नेटवर्क पर माल यातायात में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 13.74 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। अलग रेल मार्ग मिलने से मालगाड़ियों के परिचालन में अधिक लचीलापन आया है और समयबद्धता के साथ माल की तेज आवाजाही संभव हुई है।

उद्योग और व्यापार को फायदा

डीएफसी से माल परिवहन की गति बढ़ने के साथ परिवहन लागत कम करने और अधिक माल एक साथ पहुंचाने में मदद मिल रही है। डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों के संचालन से एक ही ट्रेन में अधिक माल ढोया जा सकता है। इससे निर्माता, व्यापारी, आयातक और निर्यातक अपनी आपूर्ति श्रृंखला की बेहतर योजना बना पा रहे हैं।

डीएफसी के साथ गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल भी विकसित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य माल की लोडिंग-अनलोडिंग के साथ इन्हें एकीकृत लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करना है। रेल, सड़क और बंदरगाहों के बीच बेहतर समन्वय से माल को अंतिम छोर तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत होगी।

यात्री ट्रेनों को भी मिलेगी अतिरिक्त क्षमता

माल और यात्री ट्रेनों के लिए अलग-अलग मार्ग होने से पारंपरिक रेल लाइनों पर दबाव और भीड़भाड़ कम होगी। इससे यात्री ट्रेनों की गति और समयपालन में सुधार के साथ भविष्य में अतिरिक्त यात्री सेवाएं शुरू करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

सड़क यातायात और प्रदूषण में कमी

बड़ी मात्रा में माल को सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करने से राजमार्गों पर भारी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, विद्युतीकृत डीएफसी के संचालन से डीजल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पाद जैसी आवश्यक वस्तुओं की तेज और विश्वसनीय आवाजाही से देश की आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

डीएफसी अब केवल मालगाड़ियों के लिए अलग रेल लाइन नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की आधुनिक और एकीकृत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला बन रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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