डीएफसीसीआईएल कोलकाता में एसईसीएल के सीवीओ ने निवारक सतर्कता पर दिया विशेष व्याख्यान
CBN36 बिलासपुर। सार्वजनिक धन के बेहतर और जिम्मेदार उपयोग के लिए लोक खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। खरीद प्रक्रिया के हर चरण में सतर्कता संबंधी प्रावधानों और नैतिक मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।उक्त बाते एसईसीएल के मुख्य सतर्कता अधिकारी सीवीओ हिमांशु जैन ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड डीएफसीसीआईएल कोलकाता में आयोजित प्रशिक्षण-सह-संवाद कार्यक्रम में कही।

डीएफसीसीआईएल द्वारा तीन माह के निवारक सतर्कता अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में श्री जैन ने ‘लोक खरीद’ और ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सतर्कता’ विषय पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव और व्यावहारिक दृष्टिकोण के माध्यम से लोक खरीद प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं और संभावित जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की।
श्री जैन ने कहा कि निवारक सतर्कता का उद्देश्य केवल अनियमितताओं को रोकना नहीं है, बल्कि संस्थान में सुशासन, पारदर्शी कार्यप्रणाली और सत्यनिष्ठा आधारित प्रशासनिक संस्कृति विकसित करना भी है। उन्होंने खरीद प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने आवश्यकता निर्धारण से लेकर डीपीआर तैयार करने, निविदा आमंत्रण, बोली मूल्यांकन, अनुबंध प्रदान करने, कार्य निष्पादन और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को उदाहरणों के साथ समझाया। विभिन्न केस स्टडी के माध्यम से उन्होंने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और प्रोबिटी के सिद्धांतों के पालन की आवश्यकता भी बताई।

कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ खुला संवाद हुआ। प्रतिभागियों ने लोक खरीद से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर सवाल किए, जिन पर श्री जैन ने अपने अनुभवों के आधार पर मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में डीएफसीसीआईएल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा एसईसीएल के विभिन्न निविदा-संबंधित विभागों के अधिकारी एवं युवा कार्यपालक भी शामिल हुए। एसईसीएल मुख्यालय और एमडीआई, बिलासपुर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
कार्यक्रम को विभिन्न संस्थानों के बीच अनुभव एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया। आयोजन ने निवारक सतर्कता, क्षमता निर्माण और पारदर्शी खरीद व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ संस्थागत दक्षता एवं जनविश्वास बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।
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