
CBN36 राजनांदगांव।मानसून के दौरान वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले ने ‘मिशन जल रक्षा’ के माध्यम से उल्लेखनीय पहल की है। यह अभियान राष्ट्रीय #CatchTheRain कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक तकनीकों और जनभागीदारी को जोड़कर भूजल संरक्षण का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
जिले में बारिश शुरू होने से पहले ही वर्षा जल को संचित करने और भूजल पुनर्भरण के लिए व्यापक तैयारियां की गईं। इसके तहत GIS मैपिंग, रिमोट सेंसिंग, एक्विफर मैपिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) और रिज-टू-वैली प्लानिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर उपयुक्त रिचार्ज स्थलों की पहचान की गई। साथ ही, अनुपयोगी बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट में परिवर्तित किया गया तथा इंजेक्शन वेल और परकोलेशन टैंक बनाए गए।

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी रही। किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्राम पंचायतों ने जल संरक्षण, जल बजटिंग और जागरूकता अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके साथ ही, गर्मी के मौसम में धान की लगभग 70 प्रतिशत खेती को कम पानी वाली फसलों की ओर स्थानांतरित किया गया, जिससे भूजल पर दबाव कम हुआ।

जिले में 662 गांवों में 60,000 से अधिक जल संरक्षण एवं रिचार्ज संरचनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा 500 से अधिक बंद बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट में बदला गया, 600 से अधिक इंजेक्शन वेल और 1,700 से अधिक परकोलेशन टैंक बनाए गए तथा 2,500 से अधिक जल स्रोतों का जियो-टैगिंग किया गया। इन कार्यों से 51 लाख से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ और जिले में भूजल स्तर औसतन 2.04 मीटर बढ़ा।
‘मिशन जल रक्षा’ यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक योजना, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से मानसून की हर बूंद को भविष्य की जल सुरक्षा में बदला जा सकता है। राजनांदगांव अब देश के लिए वर्षा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण का एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है।
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