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July 20, 2026 3:24 pm

छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा मेरे बाप बिसाहू दास महंत ने दिया -सदन में गूंजे डॉ. चरणदास महंत के शब्द

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल बेहद रोचक हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अपने भाषण की शुरुआत संत पवन दीवान की प्रसिद्ध कविता से की। कविता की पंक्तियां सदन में गूंजीं-

“चुप-चुप रहकर सब कुछ सह कर सबका मान बढ़ाते हैं,

बार-बार अपमानित होकर गैरों का गुणगान गाते हैं,

मेहमानों को खूब खिलाकर खुद चुप-चाप सो जाते हैं,

इसीलिए छत्तीसगढ़िया परबुधिया कहलाते हैं।”

कविता के अंतिम हिस्से पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़िया परबुधिया नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया कहलाते हैं।”

इस पर डॉ. चरणदास महंत ने तुरंत जवाब देते हुए कहा, वाह-वाह… अब संत पवन दीवान की कविता पर भी आपत्ति है? आपको पता भी है संत पवन दीवान कौन थे?”

इसके बाद महंत ने वित्त मंत्री ओ पी चौधरी पर तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा, “आपका जन्म कब हुआ, यह तो मैं पता कर लूंगा। लेकिन आपको यह भी पता है कि ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का नारा किसने दिया था? मेरे बाप बिसाहू दास महंत ने दिया है।”

चरण दास महंत के इस जवाब के बाद सदन में कुछ पल के लिए अलग ही माहौल बन गया। उन्होंने संकेत दिया कि छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत को समझे बिना उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।

बिसाहू दास महंत का लिया नाम

डॉ. चरणदास महंत ने अपने पिता और प्रदेश के वरिष्ठ जननेता स्वर्गीय बिसाहू दास महंत का उल्लेख करते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा उन्होंने ही दिया था। बिसाहू दास महंत छत्तीसगढ़ की राजनीति का ऐसा नाम रहे हैं, जिनका अपने क्षेत्र में आज भी गहरा जनाधार और सम्मान है। उनके समर्थक आज भी उन्हें जननेता के रूप में याद करते हैं और उनकी राजनीतिक विरासत को सम्मान देते हैं।

पहले भी हो चुकी है तीखी नोकझोंक

विधानसभा में डॉ. चरणदास महंत और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बीच तीखी बहस कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर जोरदार नोकझोंक हो चुकी है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही है कि अनुभवी नेता होने के कारण महंत अक्सर अपने तर्कों और राजनीतिक अनुभव से विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं।

विधानसभा में हुई इस ताजा बहस ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीतिक विरासत, संत पवन दीवान की साहित्यिक धरोहर और “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” जैसे लोकप्रिय नारे की पृष्ठभूमि को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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