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October 19, 2026 10:41 pm

कानाफूसी

ये पुलिस का अपना अंदाज है


पुलिस जब अपने पर आ जाती है तो लॉ एंड ऑर्डर सीखाकर ही दम लेती है। बिलासपुर में भी कुछ-कुछ ऐसा ही हो रहा है। आपसी रंजिश को दो समुदाय के लोगों को हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश करने वालों का चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो गया है। पुलिस की धरपकड़ जारी है। निगरानीशुदा बदमास से लेकर छंटे गुंडे, किसी को बख्श नहीं रही है पुलिस, तभी तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वीडियो वायरल हो रहा है, सरेंडर जैसे शब्दों भी सुनाई देने लगी है। पुलिस ने एक दिन पहले अपना अंदाज दिखाया। मतलब साफ है, जिस मोहल्ले में गुंडई चलती है, उन्हीं के बीच गुंडई खत्म करने का निराला अंदाज, जुलूस निकला और गुंडों की उसी इलाके में हेकड़ी भी बंद करा दी। जुलूस निकलते ही फरारी काट रहे लोगों का वीडियो भी वायरल होने लगा है। पुलिस भी कह रही और सोच रही, कब तक मनाओगे खैर। आज नहीं तो कल घेरे में आना ही पड़ेगा।

मंत्री से ज्यादा रूतबा तो पीए का हो गया, तभी तो


सत्ता का जलवा और रूतबा देखनी है तो सरगुजा में एक दिन पहले आधी रात घटी घटना को रीकॉल करना पड़ेगा। टोल प्लाजा में मंत्री का काफिला गुजर रहा था, पहले फालो गाड़ी निकली फिर पीछे मंत्री का वाहन, यह क्या, इसके पहले ही टोल प्लाजा का बूम गिर गया। मंत्री की गाड़ी डैमेज हो गई। सामने बैठे पीए को गुस्साया आया, गाड़ी से उतरे और सीधे टोल प्लाजा के कर्मचारी के पास पहुंचे, आव देखा ना ताव, तड़ातड़ रसीद दिए कई थप्पड़। अब थप्पड़ की गूंज सुनाई देने लगी है। कर्मचारी लोकल है, ग्रामीणों के साथ थाने पहुंचकर पीएम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीण अब एक्शन मोड में आ गए हैं। एफआईआर नहीं हुई तो आंदोलन की बातें हो रही है। जाहिर है, थप्पड़ की गूंज अब सरगुजा तक सुनाई देने लगी है। सीसीटीवी जो सबूत है।

यूथ कांग्रेस के बहाने शह और मात का खेल


छत्तीसगढ़ में यूथ कांग्रेस इलेक्शन का दौर चल रहा है। उपाध्यक्ष चुनाव में पूर्व सीएम खेमे ने बाजी मार ली है। ऐसी पोलिटिक्स चली कि दूसरे खेमे का चारो खाने चित ही हो गया। पता ही नहीं चला, ये कैसे हो गया, जब तक पता चलता, गेम अप हो गया था। बाजी बघेल खेमे के हिस्से में आ गई थी। बात जब इलेक्शन की हो रही है तो लोकल टच भी जरुरी है। मौका परस्ती देखकर तो हर कोई भौचक है, कभी छत्तीसगढ़ भवन के सामने वाले भैया की सरपस्ती में नदी के उस पार राजनीति चलाने वाले नेताजी ने मौका देखकर ऐसा चौका लगाया है, भैया के अपने तो भौचक हैं ही, विरोधी खेमा भी यह देखकर दंग रह गया है। जुबान पर बस एक ही चर्चा है, मौका परस्ती इसे ही कहते हैं क्या। अगर ये मौका परस्ती है तो फिर सोच समझकर फालोअर्स रखने होंगे। विरोधी और साथ वाले भी पुराने दिन को याद कर रहे हैं जब चेला स्टाइल में भैया के आगे पीछे हुआ करते थे।

ये तो अपनो को भी नहीं छोड़ रहे


शिक्षा विभाग में इन दिनों जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर तो लगता है, ये तो अपनों को भी नहीं छोड़ रहे हैं, अब देखिए ना, एसीबी ने रिश्वत के आरोप में एक प्रिंसिपल और एक बाबू को अरेस्ट कर लिया है। ये दोनों मिलकर अपने ही कर्मचारी से रिश्वतखोरी कर रहे थे। सहायक ग्रेड तीन से एरियर्स की राशि निकालने के एवज में 20 हजार रुपये की डिमांड कर दी, सौदा 10 हजार रुपये में तय हुआ। रुपये देने वाले कुछ और ही लोग थे। रंगे नोट जब रिश्वतखोर बाबू के हाथ लगा तो भ्रष्ट बाबू के हाथ तुरंत रिश्वत के रंगे में रंग गए। नतीजा सामने एसीबी और रिश्वतखोर पहुंच गए जेल।

अटकलबाजी


बिलासपुर हिंसा में निगरानीशुदा बदमाश के जेल जाते ही अब किसकी उलटी गिनती शुरू हो गई है। फरारी के बीच सरपस्ती को लेकर चर्चा भी चलने लगी है। उंगली किस ओर उठने लगी है?

बीते दो दिनों से बिलासपुर में घटित घटना के बाद सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी के साथ वायरल हो रहा है। इशारा किस ओर है। पुलिस को प्रपोजल या कुछ और?

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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