
“रायगढ़ साइबर पुलिस की कार्रवाई, ओडिशा और मुंबई तक जुड़े नेटवर्क की जांच जारी,एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल करेंसी, क्रिप्टो टोकन या किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता और विश्वसनीयता की जांच करें। कम समय में रकम दोगुनी करने या असाधारण मुनाफे का वादा करने वालों के झांसे में न आएं। वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं”
CBN36 रायगढ़। डिजिटल टोकन में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा कमाने का झांसा देकर ओडिशा के एक युवक से 11.60 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने आरोपियों के झांसे में आकर अपना खेत बेच दिया और रकम यूनिटी मेटा टोकन व बीड क्वाइन में निवेश कर दी। लेकिन उसे न तो मुनाफा मिला और न ही उसकी मूल रकम वापस हुई। मामले में रायगढ़ साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार, मामले में साइबर थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 16/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) में अपराध दर्ज कर जांच की जा रही है।
परिचित ने दिया ज्यादा मुनाफे का लालच
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, ओडिशा के गंजाम जिले के रहने वाले 26 वर्षीय विक्रम परिडा वर्ष 2024 से रायगढ़ में रह रहे हैं। इसी दौरान उनकी पहचान गजुला मोहन से हुई, जो चक्रधरनगर क्षेत्र में एक फास्ट फूड दुकान में कुक का काम करता था।
आरोप है कि गजुला मोहन ने यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन में निवेश कर खुद मुनाफा कमाने की बात कही। उसने विक्रम को भी ज्यादा लाभ मिलने का भरोसा दिलाया। उसकी बातों में आकर विक्रम ने अपना खेत बेच दिया और 25 जुलाई से 3 सितंबर 2024 के बीच कुल 11 लाख 60 हजार रुपये निवेश कर दिए।
बैंक खातों के जरिए हुआ लेन-देन
पुलिस जांच में सामने आया कि निवेश की रकम प्राप्त करने के लिए चंदन दास के माध्यम से बीड क्वाइन से जुड़े काम करने वाले भावेष पटेल के बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया। रकम देने के बाद भी जब विक्रम को कोई लाभ नहीं मिला और मूलधन भी वापस नहीं हुआ, तो उसने पुलिस से शिकायत की।
मुख्य आरोपी पर पहले भी दर्ज है केस
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी गजुला मोहन के खिलाफ वर्ष 2025 में भी चक्रधरनगर थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। यह मामला विवेकानंद राउत, देवेंद्र महापात्रे और शरद जैन से संबंधित शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि उस मामले में न्यायालय से स्टे मिलने के बाद वह फरार हो गया था। पुलिस पुराने मामले के तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।
बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल फोन बने जांच का आधार
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट की जांच में पीड़ित और आरोपियों के बीच रकम के लेन-देन की जानकारी मिली। विवेचना के दौरान तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया है। उनके मोबाइल फोन भी जांच में शामिल किए गए हैं।
पुलिस को मुख्य आरोपी के संपर्क ओडिशा और मुंबई तक होने तथा ठगी की रकम आगे अन्य लोगों तक भेजे जाने के संकेत मिले हैं। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
तीन आरोपी गिरफ्तार
- गजुला मोहन (45 वर्ष), निवासी जिला गंजाम, ओडिशा; वर्तमान पता संजय नगर, चक्रधरनगर, रायगढ़।
- चंदन दास (33 वर्ष), निवासी जगतसिंहपुर, ओडिशा; वर्तमान निवासी रायगढ़ स्टेडियम के पास, चक्रधरनगर।
- भावेष पटेल (28 वर्ष), निवासी कारीछापर, थाना पुसौर, जिला रायगढ़।
तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
एसएसपी ने निवेश को लेकर किया सतर्क
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल करेंसी, क्रिप्टो टोकन या किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता और विश्वसनीयता की जांच करें। कम समय में रकम दोगुनी करने या असाधारण मुनाफे का वादा करने वालों के झांसे में न आएं। वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
मामले के खुलासे में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, सहायक उप निरीक्षक नंद कुमार सारथी, सहायक उप निरीक्षक ज्योत्सना शर्मा तथा प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह, रूप राम पटेल और आरक्षक पुष्पेंद्र जाटवर की अहम भूमिका रही। कार्रवाई एडिशनल एसपी अनिल सोनी और एडिशनल एसपी ट्रैफिक पुष्पेंद्र बघेल के मार्गदर्शन में की गई।
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