पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम देकर ठगी की रकम के लेनदेन में करते थे मदद, लाखों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले
भिलाई। साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले नौ म्यूल खाताधारकों और एजेंटों को पुरानी भिलाई पुलिस एवं एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी दो हजार से 10 हजार रुपये तक के कमीशन के बदले अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक तथा सिम कार्ड साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों के जरिए साइबर ठगी की अवैध राशि का अंतरण कर उसके स्रोत को छिपाया जाता था।
पुलिस के अनुसार, थाना पुरानी भिलाई में दर्ज अपराध क्रमांक 258/2026 की विवेचना के दौरान बैंक खातों के तकनीकी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में संबंधित खातों में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन मिले। इसके बाद विशेष अभियान के तहत नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए गए।
गिरफ्तार आरोपियों में लक्की खुटेल, भारत गिरी, भोज ठाकुर, चोमन साहू, कमलेश देशलहरे, रमाकांत साहू, आकाश भट्ट, संजय निषाद (एजेंट) और मनोज कुमार साहू (एजेंट) शामिल हैं। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी सीधे ठगी की रकम अपने खातों में न लेकर ऐसे म्यूल खातों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि धनराशि का स्रोत छिपाया जा सके। इसके लिए खाताधारकों को कमीशन का लालच दिया जाता है।
पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम उपयोग के लिए न दें। ऐसा करना भी अपराध की श्रेणी में आता है और संबंधित खाताधारक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस थाने में दें।
प्रधान संपादक


