छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन-2047 : धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर जोर

दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि,नैनो यूरिया-डीएपी को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम
रायपुर, 29 मई 2026। धान के कटोरे के रूप में पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ कृषि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नवा अंजोर विजन-2047 के तहत किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक रणनीति पर कार्य किया जा रहा है।
नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने राज्य की कृषि रणनीतियों और उपलब्धियों की जानकारी दी।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार नवा अंजोर विजन-2047 के माध्यम से लगभग 40 लाख किसान परिवारों के आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। इनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत किसान हैं, जबकि 31 प्रतिशत किसान अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में दलहन उत्पादन में 76 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है तथा तिलहन फसलों के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि खरीफ 2026 में अरहर, उड़द और मूंग की खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू की जा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित उर्वरक उपलब्ध कराना है।
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कहा कि खरीफ 2026 की तैयारियां पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीक आधारित हैं। किसानों को कृषि विश्वविद्यालयों की अनुशंसा के आधार पर उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। सीमांत किसानों को एकमुश्त उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि यूरिया की कालाबाजारी और अत्यधिक खपत रोकने के लिए अन्य किसानों को 20 से 25 दिनों के अंतराल में चरणबद्ध तरीके से यूरिया वितरण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी, एसएसपी तथा एनपीके कॉम्प्लेक्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पूरी खरीद एवं सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है।
राज्य में दलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के बीज वितरण से तिलहनी फसलों का क्षेत्रफल 28 हजार हेक्टेयर से अधिक बढ़ा है। वहीं बागवानी क्षेत्र में फल, सब्जी और मसाला फसलों के लिए क्लस्टर आधारित विकास मॉडल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
टिकाऊ एवं जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 23,050 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया गया है। इसके लिए 461 क्लस्टर और 922 कृषि सखियों की सहायता ली जा रही है। वर्ष 2025-26 में 2.81 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए हैं। साथ ही नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य के 126 पीएम श्री स्कूलों में सॉइल टेस्टिंग लैब स्थापित की गई हैं।
पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई, ड्रोन तकनीक और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम फसल, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य गतिविधियां को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम किसान और पीएम फसल बीमा योजना के डेटा को एकीकृत कर जून-जुलाई 2026 में विशेष किसान क्रेडिट कार्ड अभियान चलाने की तैयारी है।
सम्मेलन में कृषि मंत्री श्री नेताम ने केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं। उन्होंने धान प्रधान राज्य होने के कारण फसल विविधीकरण के लिए पृथक प्रोत्साहन नीति बनाने, प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों के लिए अलग न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने तथा उर्वरकों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को छोटे किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष अनुदान देने तथा वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुरूप 25 किलोग्राम की छोटी उर्वरक बोरियां उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया। इसके साथ ही आदिवासी एवं वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए विशेष कृषि विकास पैकेज और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तकनीकी एवं आईटी अधोसंरचना सहायता प्रदान करने की मांग की गई।
इस अवसर पर कृषि संचालक राहुल देव, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय अग्रवाल, उद्यानिकी संचालक लोकेश चंद्राकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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