बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जिला बालोद के नगर पंचायत अर्जुंदा निवासी एवं शासकीय प्राथमिक शाला शिकारीटोला में पदस्थ सहायक शिक्षक (पंचायत) तस्लीम बानो की सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा 24 अगस्त 2021 को जारी बर्खास्तगी आदेश को अवैध मानते हुए याचिका स्वीकार कर ली।
प्रकरण के अनुसार, तस्लीम बानो की नियुक्ति वर्ष 2005 में सहायक शिक्षक (पंचायत) के पद पर हुई थी तथा वर्ष 2009 में उनका नियमितीकरण किया गया। पारिवारिक कारणों से उन्होंने 9 फरवरी 2015 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डौंडीलोहारा के समक्ष अवैतनिक अवकाश के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद 4 नवंबर 2020 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने सहायक शिक्षक पद से त्यागपत्र भी दिया, लेकिन विभाग ने त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया।
इसके बजाय विभाग ने विभागीय जांच करते हुए 24 अगस्त 2021 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए तस्लीम बानो ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दायर की।
मामले की अंतिम सुनवाई 7 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने तर्क दिया कि तस्लीम बानो वर्ष 2009 से नियमित कर्मचारी थीं। जून 2010 से फरवरी 2015 के बीच लगभग 233 दिनों की अनुपस्थिति को आधार बनाकर विभाग ने बिना समुचित सुनवाई का अवसर दिए छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के नियम 10 के तहत कार्रवाई कर उन्हें बर्खास्त कर दिया, जबकि नियमित कर्मचारी होने के कारण उनके विरुद्ध नियम 7 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने माना कि विभाग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया विधिसम्मत नहीं थी। न्यायालय ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा 24 अगस्त 2021 को जारी बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए तस्लीम बानो की याचिका स्वीकार कर ली।
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