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May 24, 2026 9:22 pm

बस्तर के जंगलों से राष्ट्रपति भवन तक: ‘बड़ी दीदी’ और गोडबोले दंपत्ति को मिलेगा पद्म श्री सम्मान सोमवार को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में होगा ‘पीपल्स पद्म’ समारोह, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित

नई दिल्ली-रायपुर। देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आज आयोजित होने वाले नागरिक अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की सेवा और समर्पण की गूंज पूरे देश में सुनाई देगी। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू सुदूर वनांचलों में दशकों तक निस्वार्थ भाव से समाजसेवा करने वाली डॉ. बुधरी ताती ‘बड़ी दीदी’ तथा समाजसेवी दंपत्ति डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले को प्रतिष्ठित ‘पद्म श्री’ सम्मान से अलंकृत करेंगी।

देश में पद्म पुरस्कारों को अब ‘पीपल्स पद्म’ के रूप में नई पहचान मिल रही है। पहले जहां इन सम्मानों को केवल बड़े शहरों और प्रभावशाली लोगों तक सीमित माना जाता था, वहीं अब दूरस्थ जंगलों, जनजातीय अंचलों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चुपचाप सेवा करने वाले लोगों को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया जा रहा है।

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली डॉ. बुधरी ताती पिछले चार दशकों से वनवासी समाज के बीच शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सुधार के लिए कार्य कर रही हैं। जनजातीय समाज उन्हें स्नेहपूर्वक ‘बड़ी दीदी’ कहकर पुकारता है।

वर्ष 1984 से शुरू हुई उनकी सेवा यात्रा आसान नहीं थी। उस समय बस्तर के कई इलाकों में सड़क, संचार और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था। बावजूद इसके, उन्होंने अबूझमाड़ और दंतेवाड़ा के दुर्गम जंगलों में पैदल पहुंचकर आदिवासी परिवारों का विश्वास जीता और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का अभियान चलाया।

उन्होंने महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई और हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया। उनकी प्रेरणा से कई आदिवासी बेटियां आज नर्सिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दे रही हैं।

डॉ. बुधरी ताती ने कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, अंधविश्वास, शराबखोरी और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक समस्याओं के खिलाफ भी लगातार अभियान चलाया। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका यह प्रयास आज बस्तर में सामाजिक परिवर्तन की मिसाल माना जाता है।

वहीं, डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले ने भी बस्तर और आसपास के जनजातीय इलाकों में चिकित्सा सेवा और सामाजिक उत्थान का उल्लेखनीय कार्य किया है। नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कठिन दायित्व उन्होंने वर्षों तक निभाया।

गोडबोले दंपत्ति ने कुपोषित बच्चों की पहचान, स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन और आदिवासी समाज में आधुनिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने ग्रामीण युवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देकर गांव स्तर पर स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया।

उनकी सेवाओं का प्रभाव केवल इलाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने आदिवासी समाज में जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक आत्मविश्वास विकसित करने में भी अहम भूमिका निभाई।

इस वर्ष घोषित कुल 131 पद्म पुरस्कारों में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। इन सम्मानों में देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे लोगों को चुना गया है, जिन्होंने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया है।

विशेष बात यह भी है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं जनजातीय समाज से आती हैं। ऐसे में उनके हाथों से बस्तर के वनांचलों में सेवा करने वाले इन समाजसेवियों को सम्मान मिलना पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय माना जा रहा है।

सोमवार 25 मई राष्ट्रपति भवन में होने वाला यह सम्मान समारोह केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि देश अब बस्तर को केवल संघर्ष और हिंसा की भूमि नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक परिवर्तन की धरती के रूप में भी पहचान रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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