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July 8, 2026 3:54 pm

फर्जी डॉक्टर प्रकरण: अपोलो प्रबंधन को मिली कथित क्लीन चिट पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, निष्पक्ष पुनः विवेचना की मांग, कहा -दोषी बचा तो होगा जनआंदोलन

बिलासपुर,छत्तीसगढ़ ।अपोलो अस्पताल में कथित फर्जी डॉक्टर प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी रहे विजय केशरवानी के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन को दी गई कथित क्लीन चिट पर पुनर्विचार करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय पुनः विवेचना कराने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ला सहित लगभग 27 लोगों की असामयिक मृत्यु तथा सैकड़ों मरीजों के जीवन को खतरे में डालने वाले इस प्रकरण में केवल कथित फर्जी डॉक्टर ही नहीं, बल्कि उसे नियुक्त करने वाले अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही भी तय होना आवश्यक है। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी अस्पताल की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वह नियुक्ति से पहले चिकित्सक की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल में पंजीयन, अनुभव और अन्य दस्तावेजों का पूर्ण सत्यापन करे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन से अलग नहीं की जा सकती।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि थाना सरकंडा में दर्ज अपराध क्रमांक 0563/2025 में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कथित फर्जी डॉक्टर के साथ-साथ अपोलो अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध भी अपराध दर्ज किया गया था। ऐसे में यदि विवेचना के दौरान प्रबंधन को कथित रूप से क्लीन चिट दी गई है तो यह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस ने पूछा कि जब प्रारंभिक जांच में प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध मानी गई थी, तब बाद में ऐसे कौन से ठोस साक्ष्य मिले जिनके आधार पर उसकी जवाबदेही समाप्त मान ली गई।

कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा कि यदि किसी सामान्य नागरिक की लापरवाही से किसी की मृत्यु होती है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाती है, फिर एक ऐसे संस्थान की जिम्मेदारी कैसे समाप्त हो सकती है जिसकी कथित लापरवाही के कारण अनेक परिवारों को अपूरणीय क्षति हुई।

ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की कि अपोलो अस्पताल प्रबंधन को दी गई कथित क्लीन चिट का तत्काल पुनर्विचार किया जाए, किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पुनः विवेचना कराई जाए, नियुक्ति प्रक्रिया एवं दस्तावेजों के सत्यापन की विस्तृत जांच की जाए तथा यदि प्रबंधन की लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पूरी जांच पारदर्शिता के साथ किए जाने की भी मांग की गई।

कांग्रेस ने कहा कि यह केवल 27 परिवारों का मामला नहीं, बल्कि उन लाखों नागरिकों के विश्वास से जुड़ा विषय है जो अपने जीवन की सुरक्षा की उम्मीद लेकर अस्पतालों में जाते हैं। यदि इतने गंभीर मामले में भी जिम्मेदारी तय नहीं होगी तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना कठिन हो जाएगा।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि मामले में निष्पक्ष एवं संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस पीड़ित परिवारों और आम जनता के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संतोष गर्ग, ब्लॉक अध्यक्ष सरकंडा हितेश देवांगन, दीपक कौशिक, फरीद खान, मनोज यादव, अनिमेष रजक, हरीश यादव सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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