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April 4, 2026 4:32 pm

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के बाद ‘पावर हाउस’ बनकर उभरा सिद्दी समुदाय,तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर पहलवानों ने छोड़ी मजबूत छाप

रायपुर, 4 अप्रैल 2026। प्रतिभा को परिचय की आवश्यकता नहीं होती यह कहावत खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में सटीक साबित हुई, जहां कर्नाटक के सिद्दी समुदाय के पहलवानों ने कुश्ती में शानदार प्रदर्शन कर अपनी पहचान स्थापित की। इस उपलब्धि के साथ सिद्दी समुदाय अब कुश्ती के क्षेत्र में उभरती हुई ताकत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत में अफ्रीकी मूल के करीब 50 हजार सिद्दी समुदाय के लोग रहते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा कर्नाटक में निवास करता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में राज्य के 9 पहलवानों ने भाग लिया, जिनमें 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चारों में से तीन ने स्वर्ण और एक ने रजत पदक हासिल किया।

स्वर्ण पदक विजेताओं में मनीषा जुआवा सिद्दी 76 किग्रा रोहन एम. डोड़ामणि ग्रीको रोमन 60 किग्रा और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी 68 किग्रा शामिल हैं। वहीं, शालिना सेयर सिद्दी 57 किग्रा को रजत पदक प्राप्त हुआ।

इन खिलाड़ियों का चयन दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में हुए ट्रायल के आधार पर हुआ था, जहां भी उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किया था। कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व जताते हुए कहा कि राज्य में सिद्दी समुदाय के बीच कुश्ती का तेजी से प्रसार हो रहा है और अब अभिभावक भी बच्चों को इस खेल की ओर प्रोत्साहित कर रहे हैं।

धारवाड़ जिले के रोहन डोड़ामणि ने बताया कि उनके समुदाय में नियमित रूप से दंगल आयोजित होते हैं, जिससे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने पहले भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया है।

वहीं, शालिना सिद्दी ने रजत पदक जीतने के बाद कहा कि समुदाय में कुश्ती के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है, हालांकि वह स्वर्ण पदक से चूकने पर थोड़ी निराश हैं। प्रिंसिता सिद्दी ने बताया कि शुरुआत में उनकी रुचि नहीं थी, लेकिन समुदाय के अन्य बच्चों को देखकर उन्होंने अभ्यास शुरू किया और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का लक्ष्य है।

भारतीय खेल प्राधिकरण और खेल मंत्रालय द्वारा संचालित ‘खेलो इंडिया’ पहल के तहत उभरती प्रतिभाओं को मंच दिया जा रहा है। साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पदक संभावनाओं को मजबूत करेंगी।सिद्दी समुदाय के पहलवानों की यह सफलता दर्शाती है कि उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर दूरस्थ क्षेत्रों से भी प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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