तबादलों का मौसम और बंगलों में भीड़
अब प्रदेश में तबादलों का दौर चलेगा। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्थानांतरण को लेकर सरकार ने हरी झंडी दिखा दी है। जाहिर है, सत्ताधारी दल के दिग्गजों के बंगलों में अधिकारी कर्मचारियों की भीड़ उमड़ेगी। कुछ सीधे बंगले में इंट्री मारते नजर आएंगे तो कुछ बैकडोर इंट्री करते भी दिखाई तो नहीं देंगे दूसरे दिन सुनाई जरुर देगी। बैकडोर इंट्री होगी तो मंत्री और करीबी संत्रियों को ही तो पता चलेगा। मंत्री के करीबी और संत्री अपना मुंह खोलेंगे तब हमें पता चलेगा और हमें पता चला मतलब बात ओपन हो ही जाएगी। अब देखने वाली बात ये है, पता कब चलता है और इंट्री मारने वाले एक ही बंगलें में नजर आते हैं या फिर एक से दूसरे,तीसरे और ना जाने कितने बंगलों की परिक्रमा दिखाई देंगे। बहरहाल तबादलों के मौजूदा दौर में कई रंग दिखाई देंगे। थोड़ा इंतजार कीजिए और मजा लीजिए।
सुशासन तिहार, सीएम के कड़े तेवर और अफसरों की…….
बलरामपुर जिला मुख्यालय में सीएम ने अफसरों की संभागीय मीटिंग ली थी। मीटिंग के दौरान सीएम का कड़क अंदाज अफसरों के सामने आया था। सड़कों की बदहाली को इतने नाराज हुए, पीडब्ल्यूडी के अफसर को मीटिंग से आउट कर दिया। नाराजगी इतने भर से कम नहीं हुई। बलरामपुर से राजधानी रायपुर पहुंचे और दूसरे दिन कलेक्टर की छुट्टी हो गई। अफसरों में कुछ ऐसा खौफ कि विदाई के बिना ही कलेक्टर को बलरामपुर से रुखसत होना पड़ा। सीएम का यही तेवर अब अफसरों को हैरान और परेशान कर रहा है। सुशासन तिहार में जिले का दौर, संभागीय मीटिंग और इस दौरान पता नहीं किस पर नाराजगी का ठिकरा फूट जाए। तभी तो सुबह से लेकर शाम तक अफसरों में टेंशन बना रहता है। शाम होते ही राहत की सांस और सुबह होते ही एक बार फिर तनाव। यह तो पूरे सुशासन तिहार तक चलते रहेगा।
प्रदेश भाजपा की नई कोर कमेटी और अमर की इंट्री
पश्चिम बंगाल में जीत का परचम लहराने के बाद भाजपा ने अब उन राज्यों पर फोकस करना शुरू किया है जहां दो ढाई साल बाद विधानसभा चुनाव ड्यू है। यूपी की बात करें तो छत्तीसगढ़ के एक साल पहले विधानसभा का चुनाव पूरा हो जाएगा। लिहाजा यूपी और अन्य चुनावी राज्यों पर भाजपा आलाकमान ने फोकस करना शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ का जिक्र इसलिए जरुरी है, हाल ही में प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप में दिल्ली ने रिसफल किया है। कई दिग्गज कोर ग्रुप से बाहर हो गए हैं। जिनकी इंट्री हुई है उनमें कई नाम है। बिलासपुर संभाग की राजनीति के नजरिए से देखें तो कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री, मौजूदा विधायक अमर अग्रवाल की कोर ग्रुप में इंट्री समर्थकों के लिए उत्साहित करने वाला है। अमर की इंट्री के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। बिलासपुर जिला व संभाग में सत्ता संतुलन के नजरिए से भी इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमर की कोर ग्रुप में इंट्री का मायने भी काफी खास है। सियासत के तराजू का पलड़ा अब बराबरी पर आने की उम्मीद जताई जा रही है। जरा इंतजार करिए, सत्ता के करीबियों का किस अंदाज में पाला बदलता है।
मेयर के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं उप चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में नगरीय निकाय व त्रिस्तरीय पंचायत उप चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। नामांकन की प्रक्रिया तकरीबन पूरी हो चुकी है। पंचायत, जनपद व जिला पंचायत से लेकर नगरीय निकायों में चुनावी शोर-शराबा शुरू हो चुका है। बिलासपुर नगर निगम के एक वार्ड में उप चुनाव हो रहा है। आमतौर पर ऐसा माना जाता है, उप चुनाव मतलब सरकार के हिस्से में जनमत। कई बार अपवाद भी देखने को मिलता है। कोटा विधानसभा का उप चुनाव इसका सबसे बड़ा सियासी उदाहरण है। बिलासपुर नगर निगम के वार्ड उप चुनाव की चर्चा इसलिए भी जरुरी है, मौजूदा चुनाव सत्ताधारी दल के शहरी रणनीतिकारों और मेयर के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। शहर सरकार के कामकाज को लेकर सत्ताधारी दल के पार्षदों में ही नाराजगी देखी जा रही है। सामान्य सभा की बैठक में जो कुछ नजर आता है, वह सबके सामने है। मनभेद और मतभेद के बाद भी उप चुनाव को जीतना सत्ताधारी दल के लिए साख का सवाल है। मतदाता क्या सोचते हैं यह तो चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही पता चलेगा।
अटकलबाजी
वार्ड के उप चुनाव में अगर कांग्रेस अपनी सीट बचाने में कामयाब होती है तो इसका श्रेय किसके हिस्से जाएगा। वही सवाल सत्ताधारी दल के लिए, हार का ठिकरा किसके सिर पर फूटेगा।
कोर ग्रुप पॉलिटिक्स के बाद सत्ताधारी दल की जिले व संभाग की राजनीति किस करवट बैठते नजर आएगी। किस अंदाज में पलायन का दौर चलेगा।
प्रधान संपादक


