बलरामपुर में जिला स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न, किसानों को दी गई आधुनिक तकनीकों की जानकारी
रायपुर, 25 मार्च 2026।मधुमक्खी पालन शहद, मोम और पराग उत्पादन के लिए एक लाभकारी कृषि-आधारित व्यवसाय के रूप में उभर रहा है। वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से मधुमक्खियों को बक्सों में पालकर तथा मौसमी फूलों के अनुसार स्थान परिवर्तन कर बड़े पैमाने पर शहद उत्पादन किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
कृषि आधारित आय को सुदृढ़ करने और किसानों को अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बलरामपुर जिले में मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जिले भर से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को पारंपरिक एकल फसल पद्धति से आगे बढ़कर फसल विविधिकरण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि धान के साथ दलहन, तिलहन और मधुमक्खी पालन जैसे कृषि-आधारित व्यवसाय अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उप संचालक कृषि श्री रामचंद्र भगत ने फसल चक्र एवं विविधिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. जी. के. निगम ने बताया कि मधुमक्खी पालन कम पूंजी और सीमित श्रम में शुरू किया जा सकने वाला लाभकारी व्यवसाय है, जो प्रदेश की जलवायु के अनुकूल है।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ डॉ. जी. पी. पैकरा ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन और गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता श्री परमेश्वर गोरे ने बताया कि इस व्यवसाय से शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे बहुमूल्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।
विशेषज्ञ डॉ. सचिन जायसवाल ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने से किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। वैज्ञानिक श्री अनिल कुमार सोनपाकर ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।
अनुभवी कृषक श्री बैद्यनाथ ने बताया कि किसान अपने खेतों में 5 से 10 मधुमक्खी पेटियां स्थापित कर आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस दौरान कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वैज्ञानिकों सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
प्रधान संपादक


