छत्तीसगढ़।बिलासपुर जिले स्थित कोपरा जलाशय प्रथम बर्ड वॉक एवं संगोष्ठी कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि कोपरा जलाशय को 12 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ का पहला एवं देश का 95वां रामसर साइट घोषित किया गया था। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू ने रामसर साइट के आधिकारिक लोगो का विमोचन किया।

प्रातः7 बजे से आयोजित बर्ड वॉक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए 97 प्रकृति प्रेमियों ने सहभागिता की। इस दौरान प्रतिभागियों ने 82 प्रजातियों के स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों का अवलोकन किया। इनमें रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, यूरेशियन कूट, गडवाल तथा ओपन बिल स्टॉर्क प्रमुख रहे। बर्ड वॉक प्रातः 7 से 9 बजे तक आयोजित की गई।
मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर मनोज कुमार पाण्डेय ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर प्रतिभागियों से संवाद किया एवं प्रथम बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं दीं। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को पक्षियों के संरक्षण एवं जैव विविधता के महत्व की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में दिल्ली से आए पॉन्ड मैन ऑफ इंडिया रामवीर तंवर वाटर मैन ऑफ छत्तीसगढ़ वीरेंद्र सिंह तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक नीतू हरमूख विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने जलाशयों के संरक्षण पुनर्जीवन एवं सामुदायिक सहभागिता पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी महापौर श्रीमती पूजा विधानी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। केंद्रीय मंत्री श्री साहू ने कहा कि कोपरा जलाशय का रामसर साइट घोषित होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। यह हमारी जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा की समृद्धि को दर्शाता है।
विमोचित लोगो में प्रवासी पक्षी बार-हेडेड गूज को दर्शाया गया है जबकि हमर कोपरा, हमर गौरव संदेश स्थानीय सहभागिता और संरक्षण भावना को प्रतिबिंबित करता है।
कार्यक्रम के पश्चात स्मृति वन के विकास को लेकर केंद्रीय मंत्री, जनप्रतिनिधियों एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। स्मृति वन को विकसित कर इसे पर्यावरण संरक्षण एवं पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी।

कार्यक्रम का संचालन वन विभाग के अधिकारियों के नेतृत्व में किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन वन मंडलाधिकारी नीरज द्वारा किया गया।
उल्लेखनीय है कि रामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि होती है, जिसे 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई संधि के अंतर्गत संरक्षण प्रदान किया जाता है। भारत इस संधि में 1981 में शामिल हुआ था। देश का पहला रामसर साइट ओडिशा स्थित चिल्का झील है।
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